जून 2025 में भारतीय रक्षा अटैचेज़ से संबंधित प्रमुख घटनाक्रमों में इंडोनेशिया में भारत के रक्षा अटैशे, कैप्टन Shiv Kumar, द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) के कुछ लड़ाकू विमानों के नुकसान पर दिए गए बयान ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
कैप्टन शिव कुमार (Captain Shiv Kumar) – Defence Attache, Indonesia
10 जून को जकार्ता में एक सेमिनार के दौरान, कैप्टन Shiv Kumar ने स्वीकार किया कि 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकवादी ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के दौरान IAF ने कुछ विमान खो दिए। उन्होंने इसका कारण भारतीय राजनीतिक नेतृत्व द्वारा उस दिन पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों या वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना न बनाने के निर्देशों को बताया। उनके अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण IAF को नुकसान उठाना पड़ा।
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संशयास्पद टिप्पणियां
जून 10, 2025 को Jakarta में एक सेमिनार में Captain Shiv Kumar ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के शुरुआती चरणों में भारतीय वायु सेना (IAF) ने कुछ लड़ाकू विमान खो दिए, क्योंकि उन्हें राजनीतिक नेतृत्व से पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं और एयर डिफेंस सिस्टम्स पर हमला न करने का निर्देश था। -
सरकार की प्रतिक्रिया
बाद में भारतीय दूतावास, इंडोनेशिया ने स्पष्ट कहा कि Captain Kumar की टिप्पणियाँ मीडिया द्वारा “out of context” पेश की गई और उनका उद्देश्य सिर्फ यह दिखाना था कि भारतीय सशस्त्र बल लोकतांत्रिक, नागरिक नियंत्रण में काम करते हैं।
प्रगति: रक्षा उपग्रह और स्पेस डॉक्ट्रिन
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुश्मन क्षेत्र की गहरी और निरंतर निगरानी की आवश्यकता सामने आने के बाद भारत 52 रक्षा निगरानी उपग्रहों (surveillance satellites) के प्रक्षेपण की प्रक्रिया तेज करेगा और एक सैन्य अंतरिक्ष डॉक्ट्रिन पर कार्य कर रहा है ।
इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया, जिसमें विपक्षी दलों ने सरकार पर सैन्य नुकसान को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में, इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया कि कैप्टन Kumar के बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर प्रस्तुत किया गया है। दूतावास ने यह भी कहा कि उनके बयान का उद्देश्य भारत में सैन्य संचालन पर नागरिक नियंत्रण की परंपरा को रेखांकित करना था, न कि किसी विशिष्ट देश की आलोचना करना।
इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया, जिसमें विपक्षी दलों ने सरकार पर सैन्य नुकसान को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में, इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया कि कैप्टन Kumar के बयान को संदर्भ से बाहर निकालकर प्रस्तुत किया गया है। दूतावास ने यह भी कहा कि उनके बयान का उद्देश्य भारत में सैन्य संचालन पर नागरिक नियंत्रण की परंपरा को रेखांकित करना था, न कि किसी विशिष्ट देश की आलोचना करना।
इसके अतिरिक्त, कैप्टन Kumar ने इंडोनेशियाई वायु सेना विश्वविद्यालय के सेमिनारों में पाकिस्तान को यह चेतावनी भी दी कि यदि भारत पर परमाणु हमला किया गया, तो पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान भी व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना।
इस घटनाक्रम ने भारत के रक्षा अटैचेज़ की भूमिका और उनके सार्वजनिक बयानों की संवेदनशीलता को उजागर किया है, विशेष रूप से जब वे विदेशों में भारत की सैन्य और राजनीतिक नीतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अन्य देशों में भारतीय रक्षा अटैचेज़ की ताज़ा सूची (MEA वेबसाइटों के अनुसार):
| देश | नाम | पदनाम |
|---|---|---|
| France | Air Commodore Prashant Arya | Defence & Air Attaché |
| France | Brigadier Veeresh Thapar | Military Attaché |
| Poland | Brigadier Satish Trivedi | Defence Attaché |
| China | Colonel Mupparty Sanjeev | Defence Attaché |
| Italy | Colonel Rohan Falnikar | Defence Attaché |
| Czech Rep. | Colonel Vijayant Singh | Defence Attaché |
| Armenia | Group Captain Manish Tolani, VM | Defence Attaché |
| Ukraine | Commodore Santosh Belliappa | Defence Attaché |
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Captain Shiv Kumar की टिप्पणियों को लेकर मीडिया में हंगामा हुआ, लेकिन दूतावास ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल ऑपरेशन के संचालन संबंधी जानकारी दी थी और टिप्पणी सीमित संदर्भ में थी।
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ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने भारत को रक्षा उपग्रह क्षमता एवं स्पेस रणनीति मजबूत करने पर प्रेरित किया है।
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दुनिया के प्रमुख देशों में तैनात भारतीय रक्षा अटैचेज़ की ताज़ा तैनाती की जानकारी भी अपडेट की गई है।
UNITED STATES OF AMERICA (USA)
स्थिति एवं विशेषाधिकार
- Pentagon में अनस्कॉर्टेड प्रवेश
अगस्त 2022 से भारतीय रक्षा अटैचेज़ को Pentagon में बिना किसी अमेरिकी अधिकारी के मार्गदर्शन (unescorted access) के प्रवेश की अनुमति है। यह भारत–यूएस के बीच रक्षा सहयोग की मजबूत साझेदारी को दर्शाता है।
तैनात अधिकारी (2025 तक अपडेटेड):
- कार्मिक विभाग (Army/Navy/Air Force) से वरिष्ठ अधिकारी तैनात, पर स्वतंत्र रूप से नाम सार्वजनिक नहीं
- अमेरिकी रक्षा मंत्रालय और उद्योग से ठोस संपर्क रखने वाले अधिकारी नियुक्त
- रक्षा तकनीकी सहयोग (जैसे UAVs) के लिए संयुक्त कार्यक्रमों का संचालन
Germany
रक्षा सहयोग में बदलाव
- रणनीतिक दृष्टिकोण में बदलाव
रूस–यूक्रेन युद्ध एवं चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर जर्मनी ने भारत को रणनीतिक साझेदार मानते हुए सैन्य सहयोग बढ़ाने की ठान ली है – जिसमें निरीक्षण, अभ्यास और सामूहिक रक्षा उपकरण शामिल हैं । - जर्मन नौसेना जहाज भारत आएंगे, वहीं भारतीय एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास में जर्मन वायु सेना भी हिस्सा लेगी।
संभावित तैनाती
- भारत के साथ सह-निर्माण परियोजनाओं (जैसे AIP सबमरीन, A400M विमानों की बिक्री आदि) पर बातचीत हो रही है।
- रक्षा अटैचे की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट विवरण अभी प्रकाशित नहीं, पर संपर्क स्तर बढ़ा है।
Belgium
रक्षा सहयोग एवं अटैचे
- मार्च 2025 में घोषित – बेल्जियम अपनी पहली रक्षा अटैचे नियुक्ति पर कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में सैन्य-औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना है ।
- थियो फ़्रैंकेन (Belgian Defence Minister) ने कहा कि रक्षा गतिरोध को तोड़ने और पनडुब्बी सहयोग, टैंक परियोजना आदि के लिए इस नियुक्ति का महत्व है।
Portugal
- Lisbon स्थित भारतीय एम्बेसी में रक्षा अटैचे के रूप में कोई पद स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध नहीं है ।
- यहां अन्य अटैचे (Consular, Accounts, Admin) मौजूद हैं, पर सेना/रक्षा से सीधे संबंधित अधिकारी के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं।
| देश | प्रमुख घटनाक्रम |
|---|---|
| 🇺🇸 USA | Pentagon में पहुंच की स्वतंत्रता, संयुक्त UAV परियोजनाएँ |
| 🇩🇪 Germany | सामरिक साझेदारी, अभ्यास और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग की विस्तार |
| 🇧🇪 Belgium | पहली रक्षा अटैचे नियुक्ति, बेल्जियम–भारत रक्षा साझेदारी |
| 🇵🇹 Portugal | रक्षा अटैचे का कोई स्पष्ट पद नहीं |
इसके अतिरिक्त, कैप्टन Kumar ने इंडोनेशियाई वायु सेना विश्वविद्यालय के सेमिनारों में पाकिस्तान को यह चेतावनी भी दी कि यदि भारत पर परमाणु हमला किया गया, तो पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान भी व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना।
इस घटनाक्रम ने भारत के रक्षा अटैचेज़ की भूमिका और उनके सार्वजनिक बयानों की संवेदनशीलता को उजागर किया है, विशेष रूप से जब वे विदेशों में भारत की सैन्य और राजनीतिक नीतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।