World Cancer Day पर जागरूकता बढ़ाकर समय पर पहचान और इलाज से जीवन बचाने का संकल्प लें

World Cancer Day

World Cancer Day (विश्व कैंसर दिवस) हर साल 4 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाना, रोकथाम, समय पर पहचान और बेहतर उपचार को प्रोत्साहित करना है। यह दिवस Union for International Cancer Control (UICC) द्वारा वर्ष 2000 में स्थापित किया गया था और तब से यह कैंसर के वैश्विक बोझ को कम करने की दिशा में एकजुटता का प्रतीक बन गया है। इस साल की थीम “United by Unique” लोगों को यह संदेश देती है कि हर व्यक्ति की कहानी और अनुभव महत्वपूर्ण है और कैंसर से लड़ने में सामूहिक समर्थन, समझ और करुणा की बड़ी भूमिका है। नवीनतम गतिविधियाँ में कई शहरों और संगठनों द्वारा कैंसर जागरूकता कार्यक्रम, दौड़-मैराथन, वॉकाथॉन, संगोष्ठियाँ और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं; जैसे विजयवाड़ा में “Run for Cure 2026” मैराथन जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया, और विभिन्न स्थानों पर कैंसर सर्वाइवर्स द्वारा वॉकाथॉन/वॉक-इवेंट्स आयोजित किये जा रहे हैं। इस अवसर पर विशेषज्ञ डॉक्टर और स्वास्थ्य संगठन सत्रों और वेबिनारों के माध्यम से सेरवाइकल कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, जीवनशैली कारकों तथा जल्दी पहचान और रोकथाम पर जागरूकता सूचना साझा कर रहे हैं, ताकि लोगों को जोखिमों, लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा सके।

साथ ही, विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक कैंसर बोझ बढ़ रहा है और यदि रोकथाम तथा समय पर इलाज पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दशकों में कैंसर के मामले और मौतें बढ़ सकती हैं, इसलिए इस दिन का महत्व और भी अधिक है। विश्व कैंसर दिवस 2026 न केवल बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का दिन है, बल्कि यह कैंसर से प्रभावित लोगों के अनुभवों, उनके संघर्ष और आशा को एक विश्वव्यापी मंच पर साझा करने, समर्थन करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने का भी विश्वव्यापी आंदोलन है। भारत में कोई एक पहला कैंसर मरीज नाम या वर्ष के रूप में ऐतिहासिक रूप से दर्ज नहीं है, लेकिन चिकित्सा इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि 19वीं सदी के अंत (लगभग 1880-1900 के बीच) कैंसर के पहले वैज्ञानिक रिकॉर्ड मरीज और मामलों को ब्रिटिश भारत के अस्पतालों-कॉलेजों में नोट किया गया।

भारत में 2024–2025 के दौरान कैंसर रोगियों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश में इस बीमारी का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध सरकारी और वैज्ञानिक आंकड़ों (ICMR-नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम) के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में लगभग 15.3 से 15.6 लाख नए कैंसर मरीज दर्ज किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हैं; उदाहरण के लिए 2019 में यह संख्या लगभग 13.5 लाख और 2023 में करीब 14.9 लाख थी। इसी अवधि में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या लगभग 8.7 लाख आँकी गई, जो यह संकेत देती है कि मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और पिछले एक दशक में इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों और शोध अध्ययनों के आधार पर 2025 के लिए अनुमान लगाया गया है कि नए कैंसर मामलों की संख्या लगभग 15.7 लाख या उससे अधिक हो सकती है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भारत में पुरुषों और महिलाओं दोनों में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, हालांकि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर जैसे कुछ प्रकार अपेक्षाकृत अधिक पाए जा रहे हैं, जिससे रोकथाम, समय पर जांच और बेहतर उपचार की आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

दुनिया भर में 2024–2025 के दौरान कैंसर रोगियों के आंकड़े यह दिखाते हैं कि यह बीमारी वैश्विक स्तर पर एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) नए कैंसर मामले दर्ज किए गए, जो कि अब तक उपलब्ध सबसे नवीन और विश्वसनीय वैश्विक डेटा है। चूँकि अधिकांश देशों में अंतिम सत्यापित आंकड़े 1–2 वर्ष की देरी से प्रकाशित होते हैं, इसलिए 2024–2025 के लिए प्रत्यक्ष आंकड़े अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वैश्विक अध्ययन और प्रक्षेपणों (जैसे Global Burden of Disease Study) के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि 2025 तक नए कैंसर मामलों की संख्या बढ़कर लगभग 30.5 मिलियन (3 करोड़ 5 लाख) तक पहुँच सकती है। वहीं, 2022 में कैंसर से लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) लोगों की मृत्यु हुई थी, और मौजूदा प्रवृत्तियों को देखते हुए यह अनुमान है कि 2025 तक कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या लगभग 18.6 मिलियन (1.86 करोड़) तक पहुँच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती उम्र, अस्वस्थ जीवनशैली (जैसे तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा), पर्यावरणीय जोखिम और जनसंख्या वृद्धि कैंसर मामलों में इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से कम और मध्यम आय वाले देशों में कैंसर का बोझ तेजी से बढ़ने की आशंका है, क्योंकि वहाँ रोकथाम, समय पर जांच और उपचार सुविधाओं की पहुँच सीमित है, जिससे आने वाले वर्षों में यह वैश्विक स्वास्थ्य समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।

कैंसर के लक्षण व्यक्ति, आयु और कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत ऐसे हैं जिन पर समय रहते ध्यान देना बहुत ज़रूरी होता है। लगातार बिना कारण वजन कम होना, लंबे समय तक थकान या कमजोरी, लगातार दर्द जो ठीक न हो, शरीर के किसी हिस्से में गांठ या सूजन, त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव, घाव का देर से भरना, लगातार खांसी या आवाज में भारीपन, खून का असामान्य रूप से निकलना (जैसे खांसी, पेशाब या मल में), भूख में कमी, निगलने में कठिनाई, पाचन में लगातार समस्या, या बुखार व रात को पसीना आना जैसे लक्षण कैंसर की ओर संकेत कर सकते हैं। ये लक्षण हमेशा कैंसर ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन यदि इनमें से कोई भी समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच कराना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि समय पर पहचान और उपचार से कैंसर को नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है

कैंसर के लक्षण (Symptoms) अलग-अलग प्रकार के कैंसर में भिन्न हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत हैं जिनपर ध्यान देना ज़रूरी है। इन्हें पहचानने से समय पर इलाज संभव हो सकता है। यहाँ प्रमुख लक्षण दिए जा रहे हैं:

क्रम संख्या कैंसर का प्रकार विशेष लक्षण
1 स्तन कैंसर (Breast Cancer) स्तन में गांठ, आकार या त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव
2 फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खांसी में खून
3 मुंह का कैंसर (Oral Cancer) मुंह में घाव, छाले जो न भरें, बोलने या चबाने में परेशानी
4 गले का कैंसर (Throat Cancer) आवाज बैठना, निगलने में दर्द, गले में गांठ
5 पेट का कैंसर (Stomach Cancer) पेट दर्द, उल्टी, भूख न लगना, वजन घटना
6 आंत का कैंसर (Colon Cancer) मल में खून, कब्ज या दस्त, पेट फूलना
7 गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) असामान्य रक्तस्राव, कमर दर्द, दुर्गंधयुक्त स्राव
8 प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) पेशाब में दिक्कत, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून
9 त्वचा का कैंसर (Skin Cancer) तिल का रंग/आकार बदलना, त्वचा पर घाव
10 रक्त कैंसर (Leukemia) बार-बार संक्रमण, कमजोरी, नाक/मसूड़ों से खून

कैंसर का इलाज उसके प्रकार, स्टेज (शुरुआती या फैला हुआ), मरीज की उम्र और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। आमतौर पर इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टारगेट थेरेपी या हार्मोन थेरेपी का उपयोग अकेले या एक-दूसरे के साथ किया जाता है। यदि कैंसर शुरुआती अवस्था में हो, तो केवल सर्जरी या सीमित उपचार से भी अच्छा परिणाम मिल सकता है, जबकि उन्नत अवस्था में दवाओं और रेडिएशन की जरूरत पड़ती है। आज के समय में नई चिकित्सा तकनीकों और दवाओं की वजह से कई प्रकार के कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं या लंबे समय तक नियंत्रण में रखे जा सकते हैं। इलाज के दौरान संतुलित पोषण, मानसिक सहयोग, सकारात्मक सोच और डॉक्टर की सलाह का पालन बहुत जरूरी होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैंसर जितना जल्दी पकड़ा जाए, इलाज उतना ही सफल और आसान होता है, इसलिए लक्षण दिखने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

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