मिडल ईस्ट में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और वैश्विक भू-राजनीतिक अशांति के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

अमेरिका

मध्य पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को जन्म दिया है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां अभी पूर्ण वैश्विक युद्ध की स्थिति नहीं दर्शातीं। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर मतभेद रहे हैं ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिमी प्रतिबंधों ने दोनों देशों के रिश्तों को लगातार तनावपूर्ण बनाए रखा है। हाल के हमलों जवाबी कार्रवाइयों और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी से स्थिति अधिक संवेदनशील हो गई है क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर खतरे और ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता ने चिंता बढ़ाई है। यदि यह संघर्ष व्यापक होता है तो तेल आपूर्ति वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है रूस चीन और यूरोपीय देश भी कूटनीतिक रूप से सक्रिय हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार विश्व युद्ध जैसी स्थिति तब बनती है जब कई बड़ी शक्तियां प्रत्यक्ष रूप से आमने सामने आ जाएं फिलहाल अधिकतर देश कूटनीति और सीमित प्रतिक्रिया की रणनीति अपना रहे हैं इसलिए पूर्ण विश्व युद्ध की संभावना अभी कम मानी जा रही है। हालांकि क्षेत्रीय संघर्ष और भू राजनीतिक अस्थिरता चिंता का विषय है लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रयास फिलहाल स्थिति को वैश्विक युद्ध में बदलने से रोक रहे हैं

मध्य पूर्व में ईरान‑संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच गंभीर संघर्ष के बाद हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं, जहाँ ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद व्यापक जवाबी हमलों की शुरुआत कर दी है। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों तथा सैन्य परिसरों पर मिसाइलें और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे कई स्थानों पर विस्फोट और बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें आई हैं और नागरिकों सहित कई घायल हुए हैं। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में ईरान‑समर्थित हेज़बोल्लाह समूह के ठिकानों पर बड़े एयरस्ट्राइक किए, जिससे बेरुत और आसपास के इलाकों में धमाके महसूस किए गए और हजारों लोगों को वहाँ से निकालना पड़ा। यूरोप के देशों  जैसे फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम  ने ईरान के इन हमलों की कड़ी निंदा की है और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा का आह्वान किया है, जबकि संयुक्त रूप से अमेरिका की ओर से भी जवाबी कार्रवाई के संकेत मिलते रहे हैं।  इन हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच खाड़ी देशों में एयरलाइंस की उड़ानें रद्द हुई हैं, अंतर्राष्ट्रीय तेल और व्यापार मार्गों में व्यवधान आया है, और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल तथा आर्थिक अस्थिरता के संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय युद्ध फैलने का खतरा बना हुआ है।

पाकिस्तान का ड्रोन पुंछ एलओसी के पार भारतीय सीमा में प्रवेश करने पर सेना ने जवाबी फायरिंग की:

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश करता हुआ देखा गया, जिससे सुरक्षा बल सतर्क हो गए। अधिकारियों के अनुसार रविवार सुबह करीब 6:10 बजे एक अनमैन्ड ड्रोन पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (PoK) से भारतीय क्षेत्र के दिगवार इलाके में briefly मंडराता हुआ आया, जिसे देखते ही भारतीय सेना के जवानों ने ड्रोन को नीचे गिराने की कोशिश में दर्जनों राउंड गोलीबारी की। हालांकि सेना की फायरिंग से वह ड्रोन नीचे नहीं गिरा बल्कि कुछ देर मंडराने के बाद वापस PoK की ओर लौट गया। यह घटना पिछले तीन दिनों में दूसरी बार है जब एलओसी के पास ड्रोन गतिविधि देखी गई और सेना ने जवाबी कार्रवाई की है। सेना ने बाद में आसपास तलाशी अभियान भी चलाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्रोन द्वारा किसी प्रकार के हथियार, विस्फोटक या नशीले पदार्थों का ड्रोप तो नहीं किया गया, जिससे किसी तरह की खतरा न पैदा हो। सीमा पर यह बढ़ती ड्रोन गतिविधि भारत-पाक सीमा तनाव को दर्शाती है और सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हैं।

ईरान ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया:

हाल के मध्य पूर्व घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिसमें खास तौर पर रियाद और देश के पूर्वी हिस्सों को निशाना बनाया गया। इस हमले के बारे में सऊदी अरब की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ईरानी हमले को किंगडम की एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर रोक दिया, लेकिन सऊदी सरकार ने इसे “निर्दयतापूर्ण और बेबुनियाद” आक्रमण बताया है और इसकी कड़ी निंदा की है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईरान की यह कार्रवाई पूरी तरह राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन है और उसने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और क्षेत्र की हिफाज़त के लिए “सभी आवश्यक उपाय” करने के लिए तैयार है। इस हमले के मद्देनज़र सऊदी अरब ने ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें उसने ईरान पर अपने तथा खाड़ी देशों की सीमा पर हमले करने का आरोप लगाया। सऊदी ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे हमलों का गंभीर परिणाम हो सकता है और उसने कहा कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ा रहेगा। ईरानी हमलों के बाद कई मुस्लिम और क्षेत्रीय देशों ने सऊदी अरब के साथ संपूर्ण एकजुटता जाहिर की और ईरान की कार्रवाई की भारी निंदा की। कुछ खाड़ी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इन कार्रवाइयों को नकारात्मक रूप से देखने का आग्रह किया है। ईरान के खिलाफ सऊदी अरब की प्रतिक्रिया बेहद कड़ी रही है और क्षेत्र में सुरक्षा तथा स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ गई है, जिससे संभव व्यापक संघर्ष के खतरे के बीच तनाव और गहरा गया है।

ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया:

मध्य पूर्व संघर्ष में ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई, शारजाह और अन्य खाड़ी क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिनमें से अधिकांश को UAE की वायु रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। वहीँ कुछ मिसाइलों के मलबे और गिरते ड्रोन के टुकड़ों ने दुबई के दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बुर्ज अल अरब, पाम जुमेराह, बुर्ज खलीफा क्षेत्र और जेबल अली पोर्ट जैसे प्रमुख स्थलों पर गिरकर स्पष्ट नुकसान और धमाके पैदा किए। इन हमलों में कम से कम 3 लोग मारे गए और दर्जनों नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी श्रमिक शामिल हैं, जबकि 50 से अधिक घायल होने की भी पुष्टि हुई है। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान द्वारा शुरू किए गए 165 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और 500 से अधिक ड्रोन में से अधिकांश को रोक लिया गया, लेकिन मलबे के गिरने से कई सामान्य नागरिकों को चोटें आईं और इमारतों व इंफ्रास्ट्रक्चर को क्षति पहुँची। हमलों के कारण दुबई और आस‑पास के एयरपोर्टों पर उड़ानें भारी संख्या में रद्द या विलंबित हुई हैं, जिससे यात्रा और व्यापार गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं; कई भारतीय यात्री सहित विदेशी नागरिक इस तनावपूर्ण स्थिति में फंसे हुए हैं और परिवारजन चिंतित हैं। सुरक्षा स्थितियों के कारण UAE ने अपनी हवाई सीमा बंद कर दी है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि प्रशासन ने एयर डिफेंस पर पूरी तरह नियंत्रण का दावा किया है और नागरिकों के सुरक्षित रहने पर जोर दिया है। ये हमले ईरान के अमेरिका और इज़राइल के ठिकानों पर हुए हमलों के जवाब में हो रहे हैं, और इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

ईरान ने कुवैत, कतर और बहरीन समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाकर बड़ा हमला किया:

ईरान ने कुवैत की ओर अत्यधिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जो अमेरिका और इज़राइल पर हुए संयुक्त हमलों के जवाब में किए गए प्रतिशोधी हमलों का हिस्सा हैं। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने लगभग 97 बैलिस्टिक मिसाइलों और 283 ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट किया, लेकिन इनके मलबे से कुछ इलाकों में आंशिक बिजली कटौती, इमारतों पर गिरावट और नुकसान देखा गया। कुवैत हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत और दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिनमें स्थानीय नागरिक भी शामिल हैं, और कई घायल लोग अस्पताल में उपचारधीन हैं। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने के बाद कुछ मलबे गिरने से मामूली भौतिक क्षति हुई, जबकि नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। कुवैत ने ईरान के इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अपने संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के तौर पर बताया, तथा यह स्पष्ट किया कि वह अपनी जमीन, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा। इस सबके बीच, फलस्वरूप एयरलाइनों ने उड़ानों को रद्द किया और देशों ने हवाई सीमाओं पर हाई अलर्ट जारी किया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और भी संवेदनशील बन गई है। ईरान ने कतर की सीमा और हवाई क्षेत्र की ओर भी मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा हमला किया, जिसे दोहा और देश के अन्य हिस्सों में महसूस किया गया। कतर सरकार के अनुसार ईरानी बलों ने लगभग 65 बैलिस्टिक मिसाइलें और 12 ड्रोन लॉन्च किए, जिनमें से 63 मिसाइलें और 11 ड्रोन को कतर की वायु रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही रोक दिया, लेकिन मिसाइलों के टुकड़ों के गिरने से कई स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुँचा और कम से कम 8 लोग घायल हुए; बाद में घायल लोगों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गयी है। कुछ मिसाइलें कतर के अल उदीद एयर बेस के पास तक पहुँचीं और एक ड्रोन ने रडार सिस्टम को निशाना बनाया, जिससे सतर्कता अलर्ट जारी किया गया। कतर के रक्षा, आंतरिक और विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त बयान में ईरान के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाला बताया, साथ ही कहा कि वह अपनी रक्षा के लिए “पूरा अधिकार” सुरक्षित रखता है। कतर ने साथ ही खाड़ी के अन्य देशों जैसे सऊदी अरब, UAE, बहरीन और कुवैत के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन भी जताया है और क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए वार्ता व बातचीत की अपील दोहराई है। इस हमले के कारण कतर सहित कई खाड़ी देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे हवाई सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर गहरा असर पड़ा है और वैश्विक यात्रा तथा आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान आया है।

ईरान ने बहरीन पर भी गंभीर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जो इज़राइल और अमेरिका के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा थे। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना की पाँचवीं फ़्लीट (US Fifth Fleet) के मुख्यालय और इससे जुड़े सैन्य व लॉजिस्टिक स्थलों को निशाना बनाया, जिससे मनामा में कई धमाके सुनाई दिए और काले धुएँ के बादल उठे। बहरीन की रक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर हमलों को रोकने के लिए मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, लेकिन कई मिसाइल टुकड़ों और ड्रोन मलबे के गिरने से राजधानी के कुछ हिस्सों में भौतिक क्षति और गिरवी प्रभाव देखा गया। अत्यधिक इंटरसेप्शन के बावजूद आतंकित आवाज़ें और एहतियाती सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। इन हमलों में विमान तल पर या प्रमुख ढांचों को बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन बहरीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर ड्रोन से हमला और इसके आसपास के इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचना भी दर्ज किया गया, जिससे वहां की सुरक्षा स्थिति और तनाव बढ़ गया है। बहरीन सरकार ने नागरिकों से शांत रहने का आग्रह किया है और कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं, जबकि यह संघर्ष खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक व सैन्य तनाव को और गहरा रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और सामरिक स्थितियों पर भी असर पड़ा है।

ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका को अत्यधिक मांगें घटाने की चेतावनी दी अंतिम चरण की वार्ता के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी:

हाल के कूटनीतिक प्रयासों में, ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते (JCPOA) और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा जारी है। ईरान की ओर से प्रमुख मांगें हैं कि अमेरिका को अपने लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना चाहिए, विशेषकर तेल, बैंकिंग और आयात-निर्यात से जुड़े प्रतिबंध। ईरान चाहता है कि वार्ता में अमेरिका की ओर से किए गए “अत्यधिक और असंगत” दबावों को कम किया जाए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार प्रभावित हुए बिना समझौता संभव हो सके। इसके साथ ही, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण पहलुओं को बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों को यथास्थिति में स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा है। दूसरी ओर, अमेरिका की मांगें मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना, मिसाइल विकास पर नियंत्रण, और क्षेत्रीय सहयोगियों पर प्रभाव कम करना शामिल हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों में पारदर्शिता दिखाए, ताकि खाड़ी और मध्य पूर्व में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान के सहयोगियों द्वारा की जा रही आतंकवाद समर्थक गतिविधियों को रोकने पर जोर दिया है। दोनों पक्षों की ये प्राथमिकताएँ अब अंतिम दौर की वार्ता (last-ditch negotiations) में टकरा रही हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपनी मांगों को अत्यधिक और अव्यावहारिक बनाए रखता है, तो कोई समझौता संभव नहीं होगा। इस बीच वार्ता के पीछे का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और युद्ध की संभावनाओं को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौर में संयम, स्पष्टता और व्यवहारिक प्रस्ताव ही किसी ठोस समझौते की कुंजी हो सकते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता और बढ़ते तनाव पर Donald Trump की प्रतिक्रिया काफी कड़ी और निश्चित रही है। ट्रंप ने बातचीत को लेकर कहा है कि वे ईरान की ओर से मिलने वाले प्रस्तावों और प्रगति से खुश नहीं हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान वार्ता में पर्याप्त रियायतें नहीं देता तो अमेरिका को अन्य विकल्पों जैसे सैन्य कार्रवाई या ताकत दिखाने पर विचार करना पड़ेगा। ट्रंप ने मीडिया से कहा कि वे ईरान के वर्तमान तरीके से बातचीत को “अप्रभावी” मानते हैं और अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुँचे हैं कि सैन्य कार्रवाई की जाएगी या नहीं, लेकिन उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार न विकसित करने देने की ठोस चेतावनी दोहराई है। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को लगातार चेतावनी दी है कि अगर वह अपने हमलों और उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार को बढ़ाता है तो अमेरिका “ऐसी ताकत से पलटवार करेगा जो पहले कभी नहीं देखी गई।” भी कहा है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बढ़ाने का मन बना रहा है। कुछ हालिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नए नेतृत्व के साथ बातचीत के लिए वह तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा है कि ईरान को जल्दी ही समझौते की दिशा में कदम उठाना चाहिए ताकि कोई “बहुत गंभीर परिणाम” न आए। ट्रंप की प्रतिक्रिया में वार्ता को जारी रखने की इच्छा तो दिखाई देती है, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को स्पष्ट चेतावनी और दबाव भी दिया है कि अगर बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता और ईरान “अत्यधिक मांगों” या उनकी चिंताओं को अनदेखा करता है, तो अमेरिका मजबूरन अधिक कड़े कदम उठा सकता है।

यूरोपीय संघ ने मध्य पूर्व में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर आपातकालीन बैठकों का आयोजन किया:

मध्य पूर्व में तनाव और ईरान‑यूएस‑इज़राइल संघर्ष के तेजी से बढ़ते घटनाक्रम के बीच European Union (यूरोपीय संघ) के देशों ने भी आपातकालीन बैठकें (emergency meetings) बुलाई हैं और स्थिति पर गहरा विचार किया है। यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने रविवार को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की हवाई स्ट्राइक तथा उसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया पर “अत्यधिक संयम” बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने संघर्ष के विस्तार और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस आपातकालीन चर्चा का मकसद मध्य पूर्व में बढ़ रहे सैन्य संघर्ष के संभावित आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों पर विचार करना और सीमा पार फैलते संघर्ष को रोकने के उपाय तलाशना है। यूरोपीय संघ ने ईरान की कार्रवाइयों को “क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन” बताया और साथ ही नागरिकों की रक्षा और ह्युमैनिटेरियन मानकों के पालन पर जोर दिया है। इन बैठकों के दौरान यूरोपीय नेताओं ने यह भी देखा कि संघर्ष के फैलने से आर्थिक आपूर्ति मार्गों, विशेषकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर गंभीर असर पड़ सकता है, जो वैश्विक तेल बाजार और यूरो की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। कुछ सदस्य देशों में इस मामले पर मतभेद भी दिखे; उदाहरण के लिए कुछ नेताओं ने अमेरिका और इज़राइल के समर्थन की बात कही, जबकि अन्य ने कूटनीति और वार्ता से समाधान खोजने पर जोर दिया। यूरोपीय संघ की आपात बैठकें इस संकट की गंभीरता को प्रतिबिंबित करती हैं और यह दर्शाती हैं कि यूरोपीय नेता संघर्ष को और फैलने से रोकने, कूटनीतिक समाधान खोजने और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खुला युद्ध छिड़ने से क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँचा:

अभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल ही में तनाव खासी बढ़ गया है, और दोनों देशों के बीच सीमापार संघर्ष “ओपन वॉर (खुला युद्ध)” जैसा रूप ले रहा है। पाकिस्तान ने “ऑपरेशन गजब‑लिल‑हक” नामक सैन्य अभियान शुरू किया है जिसमें उसने कथित रूप से तालिबान और अन्य लड़ाकों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए अफगानिस्तान के कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे काबुल, कंधार और पक्तिया पर एयर स्ट्राइक्स किए हैं, जिससे दोनों पक्षों में बड़े पैमाने पर झड़पें होती रही हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनकी सहनशीलता अब खत्म हो चुकी है और अब “ओपन वॉर” की स्थिति है, और उन्होंने अफगानिस्तान को आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया है।

आतंकवादियों और टीटीपी जैसे समूहों के बारे में दोनों पक्ष अलग‑अलग आरोप लगा रहे हैं: पाकिस्तान का कहना है कि अफगान सरकार खतरनाक समूहों को पनाह दे रही है, जबकि अफगान अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नागरिक इलाकों पर युद्धबंदी के उल्लंघन के कारण आम जनता को नुकसान हुआ है। दोनों देशों ने ड्रोन, हवाई हमले और सीमा पार गोलाबारी जैसी रणनीति का इस्तेमाल किया है, जिससे सीमाई इलाकों में भारी नुकसान, नागरिक हताहत, घायल और विस्थापन जैसी गंभीर मानवीय समस्याएँ सामने आई हैं। इस संघर्ष के कारण दुरंड लाइन सीमा crossings बंद होने, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत थमने, और खाड़ी तथा अन्य देशों के मध्य शांति हस्तक्षेप के प्रयासों के बावजूद स्थिति में राहत नहीं आई है, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ा हुआ है और एक बड़े सैन्य संघर्ष तथा मानवीय संकट की आशंका बनी हुई है

चीन और रूस ने अमेरिका के ईरान पर हमलों और युद्ध कार्रवाईयों की कड़ी निंदा की मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ाने पर रोक लगाने और तुरंत संघर्ष रोकने तथा बातचीत शुरू करने की अपील की:

मध्य पूर्व में यूएस‑ईज़राइल और ईरान के बीच तनाव जब युद्ध की ओर बढ़ रहा है, तो रूस और चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है और दोनों ने अमेरिका तथा इज़राइल की कार्रवाई की तीखी निंदा की है, उन्हें “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” और “अप्रत्याशित आक्रमण” कहा है, साथ ही मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या को “साइनीकल” और “अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ” बताया और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका‑इज़राइल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है, जबकि चीन ने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा का सम्मान करने तथा तत्काल युद्धविराम व कूटनीतिक वार्ता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से युद्ध के फैलने से बचने के लिए वार्ता, शांति और संयम पर बल दिया है और इस संघर्ष के विस्तार को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर संवाद और वैश्विक स्थिरता के लिए प्रयासों का समर्थन किया है।

हालाँकि रूस और चीन ने अब तक ईरान के पक्ष में सीधे सैन्य हस्तक्षेप या सैनिक समर्थन की घोषणा नहीं की है, उनके बयान यह दर्शाते हैं कि वे अमेरिका‑इज़राइल के कदमों के खिलाफ राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दे रहे हैं और युद्ध के फैलाव पर रोक लगाने के लिए दबाव बना रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष में रूस और चीन का रुख़ काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। रूस ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई की तीखी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और कहा है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयाँ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं। रूस ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है कि संयम बनाए रखना और कूटनीतिक समाधान खोजने की आवश्यकता है, ताकि संघर्ष और फैलने से रोका जा सके।

चीन ने भी ईरान के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा है कि ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा का सम्मान होना चाहिए और सभी पक्षों को तत्काल युद्धविराम और बातचीत की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। चीन ने इस बात पर जोर दिया है कि संघर्ष को बढ़ावा देने वाले किसी भी कदम से वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय शांति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जहां तक संभावित सैन्य समर्थन की बात है, अभी तक न रूस और न ही चीन ने ईरान के लिए सीधे सैन्य हस्तक्षेप या सैनिक सहायता की घोषणा की है। दोनों देश फिलहाल केवल राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दे रहे हैं और संघर्ष को फैलने से रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अमेरिका या इज़राइल की कार्रवाई और बढ़ी, तो रूस और चीन अपनी भूमिका को बढ़ा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में उनका रुख़ संयम और वार्ता पर केंद्रित है।

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