आज 12 फरवरी 2026 को भारत में एक व्यापक भारत बंद का आयोजन किया गया है, जिसका आह्वान कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने किया है। यह बंद मुख्य रूप से सरकारी नीतियों, नए श्रम कोड और भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ है, जिसका आरोप है कि वे किसानों और श्रमिकों के अधिकारों को प्रभावित करेंगे और रोजगार असुरक्षित बनाएंगे। इस बार अनेक संगठनों का दावा है कि 30 करोड़ से अधिक श्रमिक और विभिन्न समूह इस बंद में शामिल हैं, जिससे देश भर में व्यापार, बैंकिंग, परिवहन और कार्यालय सेवाओं पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है। कई शहरों और राज्यों में आज बैंक शाखाओं में कामकाज धीमा या बंद रहा है, जबकि डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहने की संभावना जताई जा रही है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, जैसे बस और रोडवेज सेवाएं, प्रभावित हुई हैं और यातायात में व्यवधान भी देखा गया है। हालांकि, हवाई सेवाओं, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है।
आज 12 फरवरी 2026 को भारत में आयोजित किए गए भारत बंद के पीछे मुख्य कारण केंद्रीय सरकार की नीतियों और नए कानूनों के विरोध में श्रमिकों और किसानों का आक्रोश है। इस बंद में कई केंद्र सरकार से जुड़े ट्रेड यूनियन और किसान संगठन शामिल हुए हैं। नए श्रम कानूनों और चार श्रम कोड के लागू होने के कारण ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इससे श्रमिकों की नौकरी असुरक्षित होगी, ओवरटाइम, वेतन और बोनस जैसी सुविधाओं में कटौती की संभावना बढ़ेगी और श्रमिकों के हक और सामाजिक सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी कारण यूनियनों ने इन कानूनों के विरोध में देशव्यापी बंद की घोषणा की है। इसके अलावा कुछ किसान संगठन भी शामिल हैं, जिनका आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों और व्यापार समझौतों के कारण किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं, जैसे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और फसल बीमा योजनाओं में असुरक्षा, और वे चाहते हैं कि सरकार उनके हक की रक्षा के लिए सुधारात्मक कदम उठाए। ट्रेड यूनियनों ने स्थायी और सुरक्षित रोजगार, न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार से वार्ता की मांग भी की है। कुछ संगठनों का यह भी आरोप है कि सरकार की नीतियाँ जन साधारण और छोटे व्यापारियों के हित के खिलाफ हैं, और बैंकिंग, डाक सेवाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण भी विरोध का एक मुख्य कारण है। इस बंद में लगभग 30 करोड़ श्रमिक और कई व्यापारिक संगठन शामिल होने का दावा किया गया है, जिससे बैंक, परिवहन, बाजार, कार्यालय और सार्वजनिक सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा है, हालांकि आपातकालीन सेवाएँ, स्वास्थ्य सेवाएँ और डिजिटल सेवाएँ सामान्य रूप से जारी रहीं।
भारत बंद का असर स्थानीय स्तर पर भिन्न हो रहा है; कुछ इलाकों में बाजार, दुकानें और कार्यालय बंद देखे जा रहे हैं, तो कुछ जगहों पर सामान्य गतिविधियाँ जारी हैं। कई जगह प्रशासन ने शांति बनाए रखने और नागरिकों से सुरक्षा पर ध्यान देने का अपील किया है। विद्यालयों और कॉलेजों के संबंध में भी कोई एकरूप निर्देश नहीं है; स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार निर्णय ले रही है कि किन क्षेत्रों में शिक्षा संस्थान बंद रहेंगे। आज 12 फरवरी को भारत बंद का आयोजन व्यापक विरोध स्वरूप किया गया है, जिसमें केंद्रीय ट्रेड यूनियनें और किसान संगठन सरकार की नीतियों के खिलाफ लामबंद हैं। देश के कई हिस्सों में बैंक, परिवहन, बाजार और कार्यालयों पर असर देखा जा रहा है, और जनजीवन कुछ हद तक बाधित हुआ है, जबकि कुछ आवश्यक सेवाएँ सामान्य रूप से चालू हैं।
कर्नाटक में ट्रेड यूनियन के श्रमिकों ने मार्च निकाला और स्थानीय दुकानदारों से अपनी दुकानें बंद करने का आह्वान किया। यह भारत बंद 2026 के हिस्से के रूप में किया गया विरोध प्रदर्शन है। श्रमिकों का कहना है कि यह बंद केंद्रीय सरकार की नीतियों, नए श्रम कोड और रोजगार सुरक्षा के मुद्दों के खिलाफ है। मार्च और प्रदर्शन का उद्देश्य जनता और व्यवसायियों को जागरूक करना और सरकार पर दबाव डालना है कि वे श्रमिकों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएं। इसके कारण कर्नाटक के कई शहरों में बाजार और दुकानें प्रभावित हुई हैं और आम जनता को दैनिक गतिविधियों में असुविधा का सामना करना पड़ा है।