आज GIFT Nifty में 50 अंकों की गिरावट से बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत

GIFT Nifty

आज सुबह प्री-मार्केट में GIFT Nifty लगभग 50 अंक नीचे खुल रहा है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में नेगेटिव/गैप-डाउन ओपनिंग का संकेत मिलता है। यह कमजोरी वैश्विक जोखिम-ऑफ माहौल और विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के कारण है, जिससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बना हुआ है। आज के सत्र के लिए पूर्व-बाज़ार संकेत बताते हैं कि GIFT Nifty में लगभग 50 अंक की गिरावट की वजह से बाजार कमजोर शुरुआत करेगा, जिससे शुरुआती ट्रेडिंग में निचले स्तरों पर सपोर्ट/रेज़िस्टेंस पर फोकस करना ज़रूरी है। जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ी वोलैटिलिटी के बीच, ट्रेडर्स को सपोर्ट ब्रेक या रिबाउंड सिग्नल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। The Economic Times की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार GIFT Nifty में लगभग 50 अंकों की गिरावट के संकेत के बाद आज का बाजार कमजोर शुरुआत कर सकता है, ऐसे में ट्रेडर्स को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। यदि निफ्टी शुरुआती दबाव में 25,000 के आसपास टिकता है तो वहां से शॉर्ट कवरिंग आधारित उछाल देखने को मिल सकता है, लेकिन इस स्तर के नीचे फिसलने पर 24,750–24,700 तक और कमजोरी आ सकती है। ऊपर की ओर 25,350–25,400 का क्षेत्र तत्काल रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जिसे पार करने पर ही मजबूती लौटेगी। ऊंचे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण बैंकिंग व आईटी शेयरों में दबाव रह सकता है, जबकि ऑयल एंड गैस तथा डिफेंस सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। बढ़ते भारत VIX को देखते हुए इंट्राडे ट्रेडर्स को छोटे टारगेट और सख्त स्टॉप लॉस के साथ काम करना चाहिए, जबकि निवेशकों के लिए गिरावट पर गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों में चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।

  • GIFT Nifty लगभग 52 अंक गिरकर 25,234 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो संकेत देता है कि आज बाजार नकारात्मक शुरुआत कर सकता है।
  • भारत VIX (जो बाजार में डर/वोलेटिलिटी मापता है) बढ़कर लगभग 13.7 तक पहुंच गया है, जिससे ट्रेडिंग सत्र में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
  • वैश्विक बाजारों में अमेरिकी और एशियाई सूचकांक फ्युचर्स कमजोर थे, जिससे जोखिम भावना कमज़ोर रही।

तकनीकी नजरिए से प्रमुख स्तर:

  • सपोर्ट (नीचे): ~25,000 और ~24,750 के आसपास — इन स्तरों के नीचे टूटने पर और कमजोरी देखी जा सकती है।
  • रेज़िस्टेंस (ऊपर): ~25,370 — अगर बाजार यहाँ से ऊपर बंद होता है, तो रिकवरी की संभावना रहेगी।

मार्केट सेंटिमेंट:

  • प्री-मार्केट में निचली शुरुआत के कारण बाजार में नरमी / जोखिम से बचने वाला रवैया दिख रहा है।
  • वैश्विक तनाव (जैसे US-Iran तनाव) और कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें कुछ सेक्टर्स पर दबाव डाल सकती हैं।
  • उधर, ऊर्जा (Oil producers) और डिफेंस सेक्टर को सकारात्मक रूख मिल सकता है अगर वैश्विक जोखिम निवेशकों को सुरक्षित-स्तर वाले शेयरों की ओर खींचे।

शुक्रवार को व्यापक बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 961 अंक यानी 1.2% गिरकर 81,287 पर बंद हुआ, जिसमें बैंकिंग शेयरों ने सबसे ज्यादा गिरावट दिखाई। टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली और ईरान-अमेरिका वार्ता में किसी ठोस प्रगति के अभाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते सप्ताहांत से पहले उन्होंने जमकर मुनाफावसूली की। विदेशी निवेशकों ने अकेले शुक्रवार को 7,536 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि गुरुवार को भी 2,429 करोड़ रुपये निकाले गए थे, जिससे दो सत्रों में कुल निकासी लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एनएसई पर निफ्टी 318 अंक यानी 1.3% टूटकर 25,179 पर बंद हुआ। इस गिरावट से बीएसई का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 463.5 लाख करोड़ रुपये रह गया और निवेशकों की संपत्ति में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। रिलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी (रिसर्च) अजीत मिश्रा के अनुसार बिकवाली लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली और कमजोर वैश्विक संकेत, अस्थिर विदेशी निवेश प्रवाह तथा भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार धारणा को और कमजोर किया। सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में बंद हुए, जिनमें आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल ने गिरावट में सबसे अधिक योगदान दिया। व्यापक बाजार में गिरावट का दायरा अपेक्षाकृत संतुलित रहा, जहां बीएसई के आंकड़ों के अनुसार 2,633 शेयर गिरे जबकि 1,574 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। उधर, वॉल स्ट्रीट में भी प्रमुख सूचकांक गिरे, जहां एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों में दबाव रहा और डाउ जोंस 602 अंक, एसएंडपी 46 अंक तथा नैस्डैक 226 अंक टूटकर बंद हुए।

27 फरवरी को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच कई दिग्गज शेयरों में तेज हलचल देखने को मिली। इस दिन टॉप गेनर्स और लूजर्स की सूची में प्रमुख नाम शामिल रहे, जहां अडानी एंटरप्राइजेज लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ प्रमुख नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहा। वहीं मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल भी करीब 2 प्रतिशत टूटकर बंद हुए, जिससे सूचकांकों पर दबाव बना। बाजार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखी, लेकिन बड़ी कंपनियों में बिकवाली के कारण कुल मिलाकर धारणा कमजोर रही। निवेशकों ने सेक्टर-विशेष खबरों और वैश्विक संकेतों के आधार पर पोजीशन बदली, जिसके चलते दिनभर अस्थिरता बनी रही।पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण विदेशी मुद्रा बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ने की आशंका है। क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों जैसे डॉलर की ओर बढ़ता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनता है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल भी भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और रुपये में कमजोरी आ सकती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में डॉलर की मजबूती रुपये को और दबाव में डाल सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित हस्तक्षेप नीति और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार कुछ हद तक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकते हैं, फिर भी निकट अवधि में फॉरेक्स बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना है।

आगामी हफ्ते डालाल स्ट्रीट पर निवेशकों की नजर कई बड़े मौद्रिक और वैश्विक आर्थिक संकेतों और geopolitical घटनाओं पर रहेगी, जिनका असर शेयर बाजार की दिशा और वोलैटिलिटी पर पड़ सकता है। सबसे अहम फैक्टर रहेगा यूएस-ईरान तनाव, जिससे तेल की कीमतों, व्यापार लागत और वैश्विक मुद्रास्फीति पर दबाव बनने की आशंका है, खासकर तेल और गैस जैसे इंर्जी-सेंसिटिव सेक्टरों पर ध्यान रहेगा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, अमेरिका के नौकरी के आंकड़े (US jobs data), प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के PMI नंबर, और मुद्रा बाजार की गतिविधियाँ जैसे विदेशी निवेश धाराएँ भी बाजार के रुझान को प्रभावित करेंगे। निवेशक घरेलू Manufacturing व Services PMI, विदेशी FII फंड फ्लो, तथा चीन की Two Sessions मीटिंग्स जैसे आर्थिक संकेतकों पर भी टिका रहेंगे, क्योंकि ये सूचकें वैश्विक आर्थिक गति और जोखिम भावना को दर्शाते हैं। इसके अलावा, ऑटोस्टॉक का फरवरी के आंकड़ों पर रिएक्शन, विदेशी मुद्रा और रुपए की दिशा, और कुछ नई IPO गतिविधियाँ भी सामने आने वाले सत्रों में Dalal Street की ट्रेंड लाइन को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस हफ्ते बाजार में मोटे तौर पर गैप-डाउन ओपनिंग, वोलैटिल ट्रेडिंग रेंज, और जोखिम के प्रति सतर्क एटीट्यूड देखने को मिल सकता है, जब तक इन सभी प्रमुख इंडिकेटर्स और ग्लोबल घटनाओं से स्पष्ट सिग्नल नहीं मिलते।

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