HPV का पूरा नाम ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus) है। यह एक सामान्य वायरस है जो मुख्यतः त्वचा और जननांगों की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। एचपीवी के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ उच्च जोखिम वाले होते हैं और कैंसर, विशेषकर गर्भाशय ग्रीवा (cervical cancer) के कारण बन सकते हैं, जबकि कुछ निम्न जोखिम वाले प्रकार सामान्य मुँहासे या warts (दाद) का कारण बनते हैं। HPV मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। यह वायरस पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकता है। अक्सर यह संक्रमण किसी व्यक्ति में बिना किसी लक्षण के भी मौजूद रह सकता है, जिससे पता लगाना मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में, संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है और यह कोशिकाओं में बदलाव ला सकता है, जो बाद में कैंसर का कारण बन सकता है। HPV संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण बहुत प्रभावी है। इसके अलावा, सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना, नियमित स्क्रीनिंग (जैसे पप स्मियर टेस्ट) और साफ-सफाई बनाए रखना भी संक्रमण के जोखिम को कम करता है। इस प्रकार, एचपीवी एक आम लेकिन सावधानीपूर्वक प्रबंधनीय संक्रमण है, और समय रहते जागरूकता व टीकाकरण से इसके गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है।
साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव):
HPV वैक्सीन सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है। अधिकतर दुष्प्रभाव हल्के और अस्थायी होते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन या लालिमा, हल्का बुखार, सिरदर्द, थकान या चक्कर आना। बहुत ही दुर्लभ मामलों में एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है, इसलिए टीका लगने के बाद 15–30 मिनट निगरानी में रखा जाता है। अब तक किए गए बड़े अध्ययनों में यह टीका गंभीर दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से जुड़ा नहीं पाया गया है।
लाभ:
इस टीके का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सर्वाइकल कैंसर के 90% तक मामलों को रोकने की क्षमता रखता है यदि समय पर लगाया जाए। जिन देशों में व्यापक टीकाकरण हुआ है, वहाँ सर्वाइकल कैंसर और प्री-कैंसर घावों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। यह टीका जननांग मस्सों से भी सुरक्षा देता है और भविष्य में कैंसर के इलाज पर होने वाले खर्च व मानसिक तनाव को कम करता है।
किसे अवश्य लगवाना चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार 9 से 14 वर्ष की आयु में (यौन जीवन शुरू होने से पहले) टीका लगवाना सबसे अधिक प्रभावी होता है। इस आयु समूह में अक्सर 1 या 2 डोज पर्याप्त मानी जाती हैं (सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार)। 15 से 26 वर्ष तक की युवतियाँ और युवा महिलाएँ भी इसे लगवा सकती हैं। कुछ परिस्थितियों में पुरुषों को भी एचपीवी टीका लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वे संक्रमण फैलाने के वाहक हो सकते हैं और स्वयं भी एचपीवी से संबंधित कैंसर के जोखिम में रहते हैं। भारत सरकार ने किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एचपीवी टीकाकरण को बढ़ावा देने की पहल की है, और कई राज्यों में स्कूल आधारित अभियान चल रहे हैं। साथ ही, World Health Organization का लक्ष्य है कि 2030 तक 90% लड़कियों को 15 वर्ष की आयु से पहले एचपीवी वैक्सीन लगाई जाए, ताकि सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त किया जा सके।
भारत का ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल के रूप में उभर कर सामने आया है। एचपीवी संक्रमण गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का प्रमुख कारण है, और भारत लंबे समय से इस बीमारी के उच्च बोझ का सामना करता रहा है। ऐसे में किशोरियों को समय पर टीकाकरण उपलब्ध कराना एक दूरदर्शी और जीवनरक्षक कदम है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर एचपीवी वैक्सीन को चरणबद्ध तरीके से शामिल करना, स्कूल आधारित अभियानों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना, तथा किफायती स्वदेशी वैक्सीन CERVAVAC का विकास, जिसे Serum Institute of India ने तैयार किया है, इस कार्यक्रम को और मजबूत बनाता है। यह पहल न केवल लाखों बालिकाओं को भविष्य के सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य पर होने वाले आर्थिक बोझ को भी कम करेगी। भारत का यह कदम World Health Organization के 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्य के अनुरूप है और विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। सचमुच, यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए “A job well done” कहा जा सकता है।
हरियाणा को भारत में 28 फरवरी, 2026 को शुरू होने वाले एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान की तैयारियों के तहत पहले ही लगभग 1,14,000 HPV वैक्सीन डोज़ प्राप्त हो चुकी हैं, ताकि किशोरियों को समय पर टीका लगाया जा सके। हर जिले को शुरू में लगभग 2,000 डोज़ आबंटित किए गए हैं और राज्य में अनुमानित 3 लाख योग्य लड़कियों को इस वर्ष टीका मिलने की उम्मीद है। अभियान का लक्ष्य 14 वर्ष की उम्र की लड़कियों को मुफ्त में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाने वाला वैक्सीन देना है, जो 28 फरवरी से जिला अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों पर चरणबद्ध रूप से शुरू होगा। स्वास्थ्य सुविधाओं में वैक्सीन देने के लिए उपयुक्त कूल्ड-चेन संरचना और चिकित्सक का होना अनिवार्य है, और टीकाकरण के बाद लाभार्थियों को कम से कम 30 मिनट तक निगरानी में रखा जाएगा। सभी लाभार्थियों का डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा, अभिभावकों की सहमति प्राप्त की जाएगी, तथा डिजिटल प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा है कि इस अभियान से एचपीवी-संक्रमण और भविष्य में होने वाले कैंसर मामलों में महत्वपूर्ण कमी आएगी, और यह स्वास्थ्य समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।