एन. चंद्रशेखरन, जो 2017 से Tata Sons के कार्यकारी अध्यक्ष हैं, का नेतृत्व टाटा समूह के लिए महत्वपूर्ण रहा है और उन्होंने समूह को कई चुनौतियों में मार्गदर्शन दिया है, लेकिन वर्तमान में उनके तीसरे कार्यकाल (2027 के बाद पांच और साल) को लेकर बोर्ड में विवाद और असहमति जारी है। पिछले सप्ताह बोर्ड बैठक में नोएल टाटा (जो मुख्य शेयरधारक कंपनी Tata Trusts के अध्यक्ष हैं) ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर विशेष शर्तें रखीं, जिसमें टाटा संस को कभी सार्वजनिक (लिस्टेड) न करने की लिखित गारंटी, बिना कर्ज वाली नीति, और Air India, Tata Digital जैसी इकाइयों के घाटों को कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिससे बोर्ड ने निर्णय को फिलहाल टाल दिया है और इसे आगे की चर्चा के लिए स्थगित कर दिया है। चंद्रशेखरन ने मीडिया से कहा कि इस देरी से “टाटा समूह की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आएगा” और उन्होंने इसके लिए खुद ही देरी का सुझाव दिया है, जबकि समूह के भीतर नेतृत्व संक्रमण को लेकर जारी गवर्नेंस चुनौतियाँ स्पष्ट हो रही हैं। इससे पहले भी 2025 में टाटा ट्रस्ट्स ने उनके तीसरे कार्यकाल को समर्थन दिया था और रिटायरमेंट नीति में छूट देने पर विचार किया गया था, लेकिन अब यह मामला और गहरा होता दिख रहा है। चंद्रशेखरन की अगुवाई में समूह ने डिजिटल, विमानन और अन्य क्षेत्रों में बड़े निवेश किये हैं और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच समूह की रणनीति को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस नई स्थितिक संघर्ष ने उनके भविष्य और समूह की नेतृत्व योजना पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
एन. चंद्रशेखरन का करियर और टाटा समूह में उनका योगदान काफी व्यापक और रणनीतिक रहा है। उन्होंने Tata Sons के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में 2017 में पद संभाला और तब से समूह के विभिन्न व्यवसायों में बड़े परिवर्तन और विस्तार की दिशा में नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने डिजिटल क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया, जैसे Tata Digital के माध्यम से ई-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार, और Air India के अधिग्रहण जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी रणनीति का मुख्य केंद्र ग्रुप के विविध पोर्टफोलियो को मजबूती देना, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना रहा है। हालांकि, उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर बोर्ड और प्रमुख शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच कुछ असहमति और शर्तें आई हैं। इसमें टाटा संस को कभी सार्वजनिक (लिस्टेड) न करने की लिखित गारंटी, घाटे वाले कारोबार में सुधार और भविष्य में निवेश के दिशा-निर्देश शामिल हैं। इन सबके बावजूद, चंद्रशेखरन ने कहा है कि इन मसलों से समूह की सामान्य कार्यप्रणाली और विस्तार योजना प्रभावित नहीं होगी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने बैंकिंग, मोटर, एयरलाइन, टेक्नोलॉजी और रियल एस्टेट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत पकड़ बनाई है। यह स्पष्ट है कि चंद्रशेखरन की रणनीतिक दूरदर्शिता और निर्णायक क्षमता ने समूह को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद की है, जबकि नेतृत्व संबंधी असहमति अभी भी भविष्य के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
एन. चंद्रशेखरन – टाटा समूह में प्रमुख गतिविधियों की टाइमलाइन
1987–2009: प्रारंभिक करियर और TCS में योगदान
- चंद्रशेखरन ने Tata Consultancy Services (TCS) में शुरुआत की।
- विभिन्न तकनीकी और प्रबंधन पदों पर काम करते हुए TCS के ग्लोबल एक्सपैंशन और प्रॉफिटेबिलिटी में योगदान।
2010–2017: TCS के CEO और MD के रूप में नेतृत्व
- TCS के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर बने।
- कंपनी को वैश्विक IT सेवा बाजार में शीर्ष स्थान दिलाया।
- डिजिटल सेवाओं, क्लाउड, AI और ऑटोमेशन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया।
2017: Tata Sons के कार्यकारी अध्यक्ष बने
- टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष का पद संभाला।
- समूह की रणनीति और निवेश नीति का नया दृष्टिकोण लागू किया।
2017–2020: समूह का विस्तार और रणनीतिक निवेश
- Tata Digital की स्थापना और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास।
- Renewable energy और ESG पहल में निवेश।
- वैश्विक कंपनियों में रणनीतिक निवेश।
2021–2022: Air India अधिग्रहण और पुनर्गठन
- Air India को वापस टाटा समूह में लाया।
- एयरलाइन का पुनर्गठन, वित्तीय सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए रणनीति बनाई।
2023–2025: वित्तीय स्थिरता और समूह सुधार
- घाटे वाले प्रोजेक्ट्स में सुधार।
- Tata Capital, Tata Projects और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में विस्तार।
- बैंकिंग, ऑटो और टेक्नोलॉजी सेक्टर में डिजिटल और सस्टेनेबल निवेश।
2026–2027: तीसरे कार्यकाल की चुनौतियाँ
- टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के बीच तीसरे कार्यकाल को लेकर असहमति।
- पुनर्नियुक्ति पर शर्तें, जैसे सार्वजनिक लिस्टिंग न करना और घाटे वाले कारोबार में सुधार।
- इसके बावजूद समूह की कार्यप्रणाली और निवेश योजनाओं को जारी रखने का प्रयास।
मुख्य उपलब्धियाँ:
- वैश्विक स्तर पर टाटा समूह की स्थिति मजबूत करना।
- डिजिटल, एयरलाइन, ऑटो और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में महत्वपूर्ण निवेश।
- ESG और सामाजिक पहल में नेतृत्व।
- समूह के सभी प्रमुख व्यवसायों में दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।