नीतीश राजपूत बनाम SSC परीक्षा संचालन एजेंसी मानहानि मामले की पूरी कानूनी और सामाजिक पृष्ठभूमि

नीतीश राजपूत, SSC

यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर नीतीश राजपूत ने 2025 के सितंबर में एक वीडियो प्रकाशित किया था जिसमें उन्होंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) की परीक्षा प्रक्रिया, वेंडर सेलैक्शन और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपने विश्लेषण में आरटीआई (RTI) प्रतिक्रियाएँ, सरकारी दस्तावेज़ और सार्वजनिक रिकॉर्ड का हवाला दिया, यह सवाल करते हुए कि SSC परीक्षा के लिए चयनित वेंडर, जैसे कि Eduquity Technologies Pvt. Ltd. को क्यों चुना गया, टेंडर प्रक्रिया में क्या गड़बड़ी है, नियमों में अचानक परिवर्तन क्यों हुआ और इससे परीक्षार्थियों की असुरक्षा क्यों बढ़ती है। राजपूत का तर्क था कि ये मुद्दे लाखों SSC उम्मीदवारों को प्रभावित करते हैं और लोग इन समस्याओं से परेशान हैं। SSC परीक्षा करवाने वाली कंपनी Eduquity Technologies Pvt. Ltd. ने दिल्ली की एक अदालत में नीतीश राजपूत के खिलाफ ₹2.5 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है। कंपनी का दावा है कि राजपूत का वीडियो “भ्रामक जानकारी” फैलाता है और उससे उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा और साख को गंभीर नुकसान हुआ है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से उस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने, आर्थिक नुकसान की भरपाई देने और राजपूत के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। राजपूत ने कंपनी की मांगों का स्पष्ट रूप से विरोध किया है और कहा है कि वे वीडियो को हटाने को तैयार नहीं हैं क्योंकि उनका विश्लेषण “पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारियों और दस्तावेजों पर आधारित” है और उनका मकसद पब्लिक इन्टरस्ट और छात्रों की चिंताओं को आवाज देना है। वे मानते हैं कि उनके पास जो सबूत हैं वे सत्य हैं और वे अपना पक्ष अदालत में आगे रखेंगे। यह मामला सोशल मीडिया और स्टूडेंट कम्युनिटी में तीव्र चर्चा का विषय बन गया है, खासकर उन SSC अभ्यर्थियों के बीच जो मानते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। कुछ छात्रों और आलोचकों ने इस विवाद को व्यापक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के रूप में देखा है, जबकि कंपनी ने इसे प्रतिष्ठित जानकारी के खिलाफ अनुचित आरोप बताया है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत के फैसले का इंतज़ार है कि अंततः वीडियो ऑनलाइन रहेगा या नहीं और क्या राजपूत को मुआवजा देना होगा।

2025 में SSC की Phase-13 तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान देशभर में अभ्यर्थियों, शिक्षकों और कई यूट्यूब क्रिएटर्स द्वारा परीक्षा व्यवस्था को लेकर तीखी आलोचना, बड़ी संख्या में शिकायतें और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। यह मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर धरना-प्रदर्शन और कानूनी बहस तक पहुँच गया। परीक्षा कंप्यूटर-आधारित (CBT) मोड में आयोजित की गई थी, लेकिन कई परीक्षा केंद्रों पर सिस्टम क्रैश होना, स्क्रीन फ्रीज़ हो जाना, माउस और बायोमेट्रिक सत्यापन का ठीक से काम न करना जैसी गंभीर तकनीकी समस्याएँ सामने आईं। अनेक अभ्यर्थियों ने बताया कि परीक्षा के दौरान सिस्टम अचानक रुक गया या गलत तरीके से बंद हो गया, जिससे उनका समय नष्ट हुआ और प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ा। इसके अलावा कई जगहों पर परीक्षा अचानक रद्द कर दी गई, जिसकी जानकारी अभ्यर्थियों को पहले से नहीं दी गई, और उन्हें केंद्र पर पहुँचने के बाद यह पता चला। केंद्र आवंटन में भी भारी अव्यवस्था दिखी, जहाँ कई छात्रों को उनके चुने हुए शहर के बजाय बहुत दूर-दराज़ के राज्यों या स्थानों में परीक्षा केंद्र दिए गए, जिससे यात्रा खर्च, मानसिक तनाव और शारीरिक थकान बढ़ी। इस पूरे विवाद का एक बड़ा कारण नए परीक्षा वेंडर को लेकर भी रहा, क्योंकि SSC ने परीक्षा संचालन एजेंसी बदलकर TCS से हटाकर Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. को ठेका दिया। छात्रों और आलोचकों का आरोप रहा कि इस एजेंसी के पास इतने बड़े स्तर की परीक्षाएँ सुचारू रूप से कराने का पर्याप्त अनुभव और तकनीकी क्षमता नहीं थी, और पहले भी यह एजेंसी विवादों में रही है। इन सब समस्याओं के कारण छात्रों में भारी रोष देखने को मिला और सोशल मीडिया पर #SSCMisManagement और #SSCSystemSudharo जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जहाँ हजारों अभ्यर्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। कई वायरल वीडियो में परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था, कर्मचारियों का कथित दुर्व्यवहार और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की मौजूदगी भी देखी गई। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर और CGO कॉम्प्लेक्स समेत कई जगहों पर छात्रों और शिक्षकों ने “Delhi Chalo” आंदोलन के तहत विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें न्याय, पारदर्शिता, पुनः परीक्षा और पूरी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की माँग की गई। SSC की ओर से प्रतिक्रिया में चेयरमैन ने यह स्वीकार किया कि तकनीकी गड़बड़ियाँ हुई थीं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पूरी परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है और समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से सुधारा जा रहा है। उनका दावा रहा कि वेंडर चयन प्रक्रिया पारदर्शी थी और जो दिक्कतें आईं, वे नए सिस्टम और इंटीग्रेशन से जुड़ी शुरुआती तकनीकी समस्याएँ थीं। विवाद के बाद SSC ने कुछ प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित की और आगे की परीक्षाओं में बेहतर तकनीक, कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाएँ लागू करने की बात कही, ताकि भविष्य में ऐसी अव्यवस्था दोबारा न हो और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल किया जा सके।

इसकी शुरुआत 2025 के अंत में हुई, जब यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर नीतीश राजपूत ने SSC परीक्षा प्रक्रिया, वेंडर चयन, तकनीकी गड़बड़ियों और छात्रों की परेशानियों पर आधारित एक विस्तृत वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने RTI से मिली जानकारियों, सार्वजनिक दस्तावेज़ों और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लाखों SSC अभ्यर्थियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद 2026 की शुरुआत में SSC की परीक्षा संचालन एजेंसी Eduquity Career Technologies Pvt. Ltd. ने नीतीश राजपूत के खिलाफ ₹2.5 करोड़ का मानहानि केस दायर किया, जिसमें कंपनी ने आरोप लगाया कि वीडियो में लगाए गए आरोप तथ्यहीन, भ्रामक और उनकी व्यावसायिक साख को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। कंपनी ने अदालत से वीडियो हटाने, भविष्य में ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने और आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग की। इसके जवाब में नीतीश राजपूत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका वीडियो पूरी तरह जनहित में, सत्यापन योग्य तथ्यों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित है तथा इसका उद्देश्य किसी कंपनी को बदनाम करना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की समस्याओं को सामने लाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे वीडियो हटाने को तैयार नहीं हैं और अदालत में अपने पक्ष के समर्थन में सबूत पेश करेंगे। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, सुनवाई की प्रक्रिया जारी है और अदालत के अंतिम निर्णय पर यह निर्भर करेगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनहित और मानहानि के बीच इस मामले में किस पक्ष को कानूनी राहत मिलती है।

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