आज के व्यापार सत्र में भारतीय शेयर बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक भारी बिक्री दबाव के साथ कमजोरी दिखाते हुए गिरावट के साथ बंद हुए, जहाँ सेंसेक्स करीब 1000 से अधिक अंक नीचे और निफ्टी भी लगभग 300 अंक गिरकर 25,400 के आसपास बंद हुआ – इसका मुख्य कारण टेक्नोलॉजी और आईटी शेयरों में तेज बिकवाली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी रहा, जिससे निवेशकों में नकारात्मक भावना रही। इसके बाद आज बाजार खुलते समय वैश्विक बाजारों के सकारात्मक रूझान और GIFT निफ्टी के मजबूत संकेतों से सेंसेक्स व निफ्टी हल्की मजबूती के साथ हरे निशान में खुलने के संकेत मिले; निफ्टी 25,500 के पास और सेंसेक्स भी रिबाउंड करते दिखे, खासकर आईटी सेक्टर में कुछ रिकवरी देखने को मिली। इस तरह बाजार में तेज़ गिरावट के बाद आज सुबह सुधार का प्रयास जारी है, लेकिन उपस्थिति उतार-चढ़ाव, वैश्विक आर्थिक संकेतों और विशेष स्टॉक सेगमेंट की चाल से बाजार की दिशा प्रभावित हो रही है।
वर्तमान बाज़ार परिस्थिति को देखते हुए निवेशकों को सतर्क और रणनीतिक रुख अपनाने की आवश्यकता है। हाल की गिरावट में BSE Sensex और Nifty 50 पर दबाव देखा गया है, विशेषकर आईटी और बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली के कारण, जबकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियाँ और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट चरणबद्ध खरीदारी या SIP के माध्यम से मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश का अवसर हो सकती है, खासकर बैंकिंग, ऑटो, कैपिटल गुड्स और डिफेंस सेक्टर में दीर्घकालिक संभावनाएँ बनी हुई हैं, इसलिए एकमुश्त निवेश से बचते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। वहीं शॉर्ट टर्म निवेशकों को अधिक उतार-चढ़ाव के दौरान ओवरट्रेडिंग से बचना चाहिए, ट्रेंड के अनुसार ट्रेड करना चाहिए और इंट्राडे में 2–3% तथा स्विंग ट्रेड में 5–7% का स्टॉप लॉस सख्ती से लागू करना चाहिए। इंट्राडे ट्रेडिंग में शुरुआती 15–20 मिनट में ट्रेंड समझना, वॉल्यूम ब्रेकआउट वाले स्टॉक्स चुनना और RSI व VWAP जैसे तकनीकी संकेतकों का उपयोग लाभदायक हो सकता है, जबकि स्विंग ट्रेडिंग में सपोर्ट स्तर पर खरीदारी, रेजिस्टेंस पर आंशिक मुनाफावसूली और सेक्टर रोटेशन पर नजर रखना जरूरी है। हाल की तेजी में बैंकिंग, ऑटो, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में मजबूती देखी गई है, जबकि गिरावट के दौरान आईटी, मेटल और मिडकैप टेक कंपनियाँ दबाव में रही हैं। निवेशकों को अमेरिकी बाजार, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर इंडेक्स, FII/DII डेटा तथा बजट, RBI पॉलिसी और चुनाव जैसे बड़े घटनाक्रमों पर नजर रखते हुए जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। BSE Sensex 1,069 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई। बाजार में इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे, जिनमें वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, अमेरिकी बाजारों में दबाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, आईटी और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा निवेशकों की मुनाफावसूली शामिल हैं। इन सभी कारकों के चलते पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में दबाव बना रहा और अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई। यह खबर बताती है कि आज शेयर बाजार में भारी गिरावट का अनुभव हुआ, जब प्रमुख सूचकांकों में सेंसेक्स लगभग 1,000 अंक तक ढह गया और निफ्टी भी बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। यह कमजोरी मुख्य रूप से यूएस और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के कारण आई है। इन तनावों और व्यापार नीति के बारे में अनिश्चितताओं से निवेशकों की जोखिम-से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी, जिससे बाजार में भारी बेचवाली और दबाव पैदा हुआ; इसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स करीब 1,068 अंक गिरकर लगभग 82,225 पर, और निफ्टी50 भी लगभग 288 अंक टूटकर करीब 25,424 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट में विशेष रूप से आईटी सेक्टर के शेयरों और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों ने बाजार भावना को प्रभावित किया।
आईटी शेयरों में तेज बिकवाली के कारण आज शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान निवेशकों ने बड़े आईटी स्टॉक्स में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी के चलते जमकर बिक्री की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया। इस गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया, जहाँ BSE Sensex और Nifty 50 दोनों ही लाल निशान में बंद हुए। आईटी सेक्टर में कमजोरी के चलते समग्र बाजार भावना नकारात्मक रही और अन्य सेक्टरों पर भी इसका असर देखने को मिला, जिससे पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सूचकांकों में गिरावट बनी रही।