शुक्र प्रदोष व्रत: भगवान शिव की कृपा से जीवन में समृद्धि, सुख और शांति का अमृतमय मार्ग

शुक्र प्रदोष व्रत

कल, शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसे ‘शुक्र प्रदोष व्रत‘ के रूप में मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार को पड़ने के कारण अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो व्रत के महत्व को और बढ़ाता है। इस शुभ योग में किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी माना जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत का पालन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्र ग्रह के प्रभाव को संतुलित करने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है।

यह व्रत विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी है जो आर्थिक तंगी, शत्रुता, संतान सुख या शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव से परेशान हैं। व्रत के दौरान की गई पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

प्रदोष काल और पूजा मुहूर्त:

  • प्रदोष काल: शाम 6:38 बजे से रात 8:55 बजे तक रहेगा

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर, सुबह 4:08 बजे

  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 6 सितंबर, सुबह 3:12 बजे

व्रत की पूजा विधि :

1. प्रातःकाल की तैयारी

  • व्रत वाले दिन प्रातः जल्दी उठें।
  • स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • घर और पूजा स्थल को साफ करें।

2. व्रत का पालन

  • पूरे दिन निर्जला व्रत, निराहार व्रत या केवल फलाहार करें।
  • व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।

3. शाम को प्रदोष काल पूजा

  • प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद शुरू होकर रात 9 बजे तक रहता है।
  • पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें।

पदार्थ:

  • जल, दूध, शहद, घी, दही, चीनी
  • बेलपत्र, धूप, दीप, फूल
  • साबुत चावल, खीर, फल

प्रदोष काल पूजा

  • अभिषेक:

    • शिवलिंग पर जल, दूध, घी, दही, शहद और चीनी से अभिषेक करें।

  • सजावट:

    • बेलपत्र, फूल और चावल अर्पित करें।

  • दीप और धूप:

    • दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।

  • मंत्र जाप:

    • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र कम से कम 108 बार जपें।

  • प्रसाद अर्पण:

    • खीर, फल और अन्य प्रसाद अर्पित करें।

  • आरती:

    • शिव आरती गाकर व्रत समाप्त करें।

4. विशेष उपाय

  • व्रत में माता पार्वती का ध्यान भी करें।
  • श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

शुक्र प्रदोष व्रत की कथा

प्राचीन काल की बात है। एक नगर में राजा दक्ष अपने राज्य में अत्यंत अनुशासित और धर्मप्रिय था। उसके यहाँ सुख-समृद्धि थी, लेकिन राजा के जीवन में एक समस्या थी – उसका पुत्र बहुत अस्वस्थ और दुखी था।

राजा ने कई ब्राह्मणों और साधुओं से इस समस्या का उपाय पूछा। सभी ने सुझाव दिया कि शुक्र ग्रह के दोष के कारण राजा के घर में शांति और सुख नहीं है।

तभी एक विवेकी साधु ने राजा को कहा:

“यदि आप शुक्र प्रदोष व्रत श्रद्धा और भक्ति से करेंगे, तो भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से आपके घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी।”

राजा ने साधु की बात मानी और प्रदोष व्रत आरंभ किया। उसने दिनभर उपवास रखा, शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक किया, बेलपत्र, फूल, जल, दूध, घी, दही, शहद और प्रसाद अर्पित किया।

भगवान शिव प्रसन्न हुए और राजा के पुत्र का स्वास्थ्य ठीक हो गया। साथ ही राजा के राज्य में सुख-समृद्धि और शांति बनी रही।

कथा का संदेश

  • शुक्र प्रदोष व्रत करने से धन-संपत्ति, संतान सुख, वैवाहिक सुख और शत्रु से मुक्ति मिलती है।

  • व्रत श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक पालन करने से शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • यह व्रत शुक्र ग्रह के दोष को दूर करने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए अत्यंत लाभकारी है।

व्रत का महत्व

  • शुक्र प्रदोष व्रत शुक्र ग्रह के प्रभाव को संतुलित करता है।

  • यह व्रत विशेष रूप से धन-संपत्ति, वैवाहिक सुख, संतान सुख और शत्रु से मुक्ति के लिए लाभकारी है।

  • विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

व्रत के लाभ

  • जीवन में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है।

  • शत्रु या नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

  • संतान सुख और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।

  • सभी प्रकार के दुख और कष्ट समाप्त होते हैं।

  • शुक्र ग्रह के दोष से राहत मिलती है।

शुक्र प्रदोष व्रत पारण

  1. व्रत का समय:

    • व्रत को प्रदोष काल में या रात के समय आरती और पूजा के बाद पूरा किया जाता है।

    • व्रत का पारण संकल्पपूर्वक और श्रद्धा-भक्ति से करना चाहिए।

  2. प्रसाद ग्रहण:

    • पूजा के बाद तैयार किए गए फल, खीर और अन्य प्रसाद ग्रहण करें।

    • प्रसाद को परिवार के अन्य सदस्यों में भी बाँट सकते हैं।

  3. अन्न का सेवन:

    • व्रती दिनभर उपवास करने के बाद हल्का भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

    • भोजन में मुख्य रूप से खीर, फल और हल्का अन्न रखें।

  4. शुभ संकल्प:

    • व्रत समाप्त करते समय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए संकल्प लें कि हमेशा धर्म और सत्य के मार्ग पर चलेंगे।

शुक्र प्रदोष व्रत श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ किया जाए, तो यह अत्यंत फलदायक माना जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *