उत्तर प्रदेश में आए भीषण तूफान और आंधी ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 117 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह खतरनाक तूफान 14 मई 2026 की दोपहर और शाम के दौरान राज्य के कई जिलों में आया, जहां लगभग 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने पेड़, बिजली के खंभे, मकानों की छतें और होर्डिंग्स उखाड़ दिए। प्रयागराज, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, फतेहपुर, रायबरेली, बरेली और सोनभद्र समेत कई जिले सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। मौसम विभाग के अनुसार यह एक अत्यंत शक्तिशाली “थंडर स्क्वॉल” था, जिसमें तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि एक साथ हुई। कई स्थानों पर अचानक अंधेरा छा गया और कुछ ही मिनटों में सामान्य स्थिति भयावह आपदा में बदल गई। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश मौतें दीवार गिरने, पेड़ टूटने, बिजली के खंभे गिरने और कच्चे मकानों के ढहने से हुई हैं। तूफान में सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा बड़ी संख्या में पशुओं की भी मौत हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मृतकों के परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए और घायलों का मुफ्त इलाज कराया जाए। राज्य आपदा राहत कोष के तहत मृतकों के परिजनों को लगभग 4 लाख रुपये की सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तेज आंधी और खराब मौसम जारी रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी, पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में तेज अस्थिरता के कारण इस प्रकार के तूफानों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। तूफान के बाद कई जिलों में बिजली व्यवस्था ठप हो गई, सड़कें बंद हो गईं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। प्रशासन लगातार पेड़ हटाने, बिजली बहाल करने और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटा हुआ है।
उत्तर प्रदेश में आए इस विनाशकारी तूफान और 130 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं वाले चक्रवाती सिस्टम के पीछे कई मौसमीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance), अत्यधिक गर्मी और बंगाल की खाड़ी से आई नमी का एक साथ टकराना था। मई महीने में उत्तर भारत में तापमान बहुत अधिक हो जाता है, जिससे जमीन तेजी से गर्म होती है। जब पश्चिम से ठंडी हवाएं और ऊपरी वायुमंडलीय दबाव प्रणाली आती है तथा दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाएं उत्तर प्रदेश तक पहुंचती हैं, तब वातावरण में अत्यधिक अस्थिरता पैदा होती है। इसी अस्थिरता के कारण विशाल क्यूम्युलोनिंबस बादल बने, जिन्होंने अचानक तेज आंधी, बिजली, भारी बारिश और चक्रवाती हवाओं का रूप ले लिया। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान “थंडर स्क्वॉल” जैसी स्थिति बनी, जिसमें कुछ ही मिनटों में हवा की गति बेहद तेजी से बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में हवा की रफ्तार लगभग 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जो सामान्य आंधी से कहीं ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ते समुद्री तापमान भी ऐसे तूफानों को अधिक ऊर्जा दे रहे हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, जिससे अचानक और अत्यधिक तीव्र तूफानों की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि उत्तर भारत में लगातार बढ़ रही हीटवेव और वातावरण में नमी की मात्रा का असामान्य स्तर ऐसे विनाशकारी तूफानों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रहा है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य भारत में अचानक आने वाली तेज आंधी और धूलभरी तूफानों की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं।
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने उत्तर प्रदेश में आए भीषण तूफान और भारी जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu और प्रधानमंत्री Narendra Modi को संदेश भेजकर संवेदना प्रकट की। अपने संदेश में पुतिन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आए चक्रवाती तूफान के कारण हुई भारी जनहानि और बड़े पैमाने पर हुए नुकसान से उन्हें बेहद दुख पहुंचा है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। पुतिन ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा, “कृपया उत्तर प्रदेश में आए चक्रवात के कारण हुई भारी जनहानि और व्यापक तबाही पर मेरी गहरी संवेदनाएं स्वीकार करें। कृपया पीड़ित परिवारों और मृतकों के परिजनों तक मेरी सहानुभूति पहुंचाएं तथा सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दें।” रूस के विदेश मंत्रालय और क्रेमलिन ने भी इस आपदा पर दुख जताते हुए भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
इस भीषण तूफान और चक्रवाती हवाओं से हुई तबाही के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किए। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सभी प्रभावित जिलों के अधिकारियों, जिलाधिकारियों और राहत एजेंसियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर लोगों की मदद करने के निर्देश दिए। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और आदेश दिया कि यह सहायता 24 घंटे के भीतर प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई जाए। घायलों के मुफ्त इलाज, अस्थायी आश्रय, भोजन और दवाइयों की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा की गई। कई जिलों में NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें पेड़ हटाने, फंसे लोगों को निकालने और बिजली बहाल करने में जुटी रहीं। सरकार ने किसानों और पशुपालकों के लिए भी विशेष राहत पैकेज घोषित किया। जिन किसानों की फसल का 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने का फैसला किया गया। वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों के लिए लगभग ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि के लिए ₹17,000 प्रति हेक्टेयर और बागवानी व दीर्घकालिक फसलों के लिए ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक सहायता तय की गई। खेतों में जमा मलबा और गाद हटाने के लिए भी अलग आर्थिक सहायता देने की घोषणा हुई। पशुधन की मौत पर गाय-भैंस के लिए ₹37,500 तक और छोटे पशुओं के लिए अलग मुआवजा तय किया गया। इसके अलावा राज्य सरकार ने सभी जिलों से हर तीन घंटे में स्थिति रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए ताकि राहत कार्यों की लगातार निगरानी हो सके। मौसम विभाग की चेतावनियों के आधार पर “सचेत पोर्टल” के जरिए करोड़ों लोगों को मोबाइल अलर्ट संदेश भेजे गए। राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन नंबर 1070 को हाई अलर्ट पर रखा गया ताकि लोग तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से बिजली, सड़क और संचार व्यवस्था बहाल की जाए।