भारतीय शेयर बाजार इस समय एक बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रहा है। वैश्विक और घरेलू स्तर पर बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच, देश के दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty 50 और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का ‘सेंसेक्स’ (Sensex) नए स्तरों को छूने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में बाजार ने एक महत्वपूर्ण रिकवरी दिखाई है, जहाँ निफ्टी 50 ने ऐतिहासिक 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है, वहीं सेंसेक्स भी 76,800 के ऊपर मजबूती से कारोबार कर रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए यह हफ्ता बड़ी राहत और उत्साह लेकर आया है। पिछले कुछ हफ्तों की भारी उठापटक और बिकवाली के दबाव को पीछे छोड़ते हुए घरेलू शेयर बाजार ने शानदार वापसी की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का मुख्य सूचकांक ‘निफ्टी 50’ मजबूती के साथ 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया है। बाजार की इस चौतरफा तेजी ने न सिर्फ बड़े निवेशकों बल्कि रिटेल (आम) निवेशकों के चेहरों पर भी चमक वापस ला दी है।
निफ्टी और सेंसेक्स की नई ऊंचाई: बाजार में लौटी रौनक
जून के शुरुआती हिस्से में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में अच्छी-खासी गिरावट देखी गई थी, जहाँ निफ्टी गिरकर 23,200 के स्तर के नीचे चला गया था। लेकिन पिछले कुछ सत्रों में बाजार ने जबरदस्त ‘यू-टर्न’ लिया है। निफ्टी 50 अब 24,080 से ऊपर के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह बीएसई का सेंसेक्स भी मजबूत होकर 76,850 के पार निकल चुका है। बाजार का यह नया स्तर यह साफ दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां की कॉर्पोरेट अर्निंग्स (कंपनियों के मुनाफे) को लेकर निवेशकों का भरोसा बेहद मजबूत है।
तेजी के मुख्य ट्रिगर्स: क्यों रॉकेट बना शेयर बाजार?
बाजार में आई इस हालिया तेजी के पीछे कुछ बड़े सकारात्मक बदलाव हैं। सबसे बड़ी राहत अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से मिली है, जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक बाजार का मूड सुधार दिया। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतें गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। तेल की कीमतें घटने से कंपनियों का मार्जिन सुधरेगा और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, भारतीय रुपये में आई मजबूती और आईटी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टर्स में देखी जा रही भारी खरीदारी ने बाजार को ऊपर ले जाने में ईंधन का काम किया है।
स्मॉलकैप और मिडकैप में भी बहार: केवल बड़े शेयर ही नहीं चमके
इस बार की तेजी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह केवल कुछ बड़ी कंपनियों (Large Caps) तक सीमित नहीं है। बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) काफी मजबूत है। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की जा रही है, जिसका मतलब है कि छोटे और मझोले स्तर की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशक जमकर पैसा लगा रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल और विप्रो जैसे हैवीवेट शेयरों में आई मजबूती ने पूरे इंडेक्स को तकनीकी रूप से एक मजबूत सपोर्ट (Immediate Support around 23,800-24,000 zone) प्रदान किया है।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह: अब आगे क्या करें?
बाजार के विश्लेषकों (Market Experts) का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अब एक मजबूत सपोर्ट का काम करेगा, जबकि ऊपर की तरफ 24,200 से 24,500 के स्तर पर हल्का रेजिस्टेंस (रुकावट) देखने को मिल सकता है। ऐसे में आम निवेशकों को इस लाइफ-टाइम हाई के करीब आकर किसी भी तरह की ‘पैनिक बाइंग’ (जल्दबाजी में खरीदारी) से बचना चाहिए। यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश जारी रखें। वहीं, डायरेक्ट स्टॉक्स में पैसा लगाने वालों को मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में हर छोटी गिरावट (Buy on Dips) पर धीरे-धीरे करके निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए।
शेयर बाजार का मौजूदा रुख यह साबित करता है कि उतार-चढ़ाव बाजार का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन भारतीय बाजार की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी आज भी बरकरार है। वैश्विक संकेतों पर नजर रखते हुए, अनुशासित तरीके से किया गया निवेश ही आपको इस मार्केट से बेहतरीन रिटर्न दिला सकता है।