20 मई 2026 को आने वाली वर्दा चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है, जो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के अंतर्गत आती है। वर्दा चतुर्थी, जिसे कई स्थानों पर वरद चतुर्थी या विनायक चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत और पूजन दिवस है। यह तिथि हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आती है और इसे विशेष रूप से सुख, समृद्धि, बुद्धि और सभी कार्यों में सफलता प्रदान करने वाली माना जाता है। इस दिन “वरद” का अर्थ “वरदान देने वाला” होता है, इसलिए इसे ऐसी चतुर्थी माना जाता है जिसमें भगवान गणेश अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, बुद्धि और सभी बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखकर गणपति बप्पा की विधिवत पूजा करते हैं। इस व्रत का धार्मिक महत्व यह है कि यह जीवन की बाधाओं को दूर कर कार्यों में सफलता और धन-समृद्धि प्रदान करता है। मान्यता है कि वर्दा चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करने से रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को गणेश कथा सुनकर पूजा संपन्न करते हैं, तथा चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। आधुनिक समय में लोग इस व्रत को घरों के साथ-साथ ऑनलाइन पूजा और डिजिटल कथा श्रवण के माध्यम से भी करते हैं। 20 मई 2026 की वर्दा चतुर्थी भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी और शुभ अवसर माना जाता है जो जीवन में सौभाग्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस दिन भक्त प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थान को साफ करके गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करते हुए पूजा की शुरुआत की जाती है। भगवान गणेश को लाल पुष्प, दूर्वा घास, मोदक, लड्डू, फल, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष और व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दिनभर व्रत रखा जाता है, जिसमें कुछ लोग फलाहार करते हैं और कुछ निर्जला उपवास रखते हैं। शाम के समय पुनः गणेश जी की आरती की जाती है और दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है और प्रसाद सभी में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान गणेश सभी विघ्न दूर करते हैं और भक्तों को बुद्धि, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय की बात है जब देवताओं और ऋषियों के कार्यों में बार-बार विघ्न आने लगे और सभी चिंतित होकर भगवान शिव के पास पहुँचे। भगवान शिव ने उन्हें बताया कि इन सभी बाधाओं का निवारण केवल उनके पुत्र भगवान गणेश कर सकते हैं, क्योंकि वे “विघ्नहर्ता” और “वरदायक” हैं। इसके बाद देवताओं ने भगवान गणेश की विधिवत पूजा की और उनसे सभी कार्यों में सफलता का वरदान माँगा। भगवान गणेश उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्होंने वचन दिया कि जो भी भक्त शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उनकी आराधना करेगा, उसके जीवन के सभी विघ्न दूर होंगे और उसे मनोवांछित फल प्राप्त होगा। एक अन्य कथा के अनुसार, एक निर्धन ब्राह्मण अपनी गरीबी और जीवन की कठिनाइयों से बहुत दुखी था। उसने वर्दा चतुर्थी के दिन पूरे श्रद्धा भाव से भगवान गणेश की पूजा की और व्रत रखा। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसे धन, सम्मान और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि इस दिन की गई पूजा विशेष रूप से फलदायी होती है और भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार वर्दा चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सफलता, समृद्धि एवं विघ्नों से मुक्ति का प्रतीक मानी जाती है।