पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों (Municipal Elections 2026) के नतीजे आ चुके हैं। सूबे की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन चुनावों में अपना दबदबा साबित करते हुए एक बड़ी जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस जीत को अपनी सरकार के विकास कार्यों पर जनता की मुहर बताया है और इसे 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का ‘ट्रेलर’ करार दिया है।
मुख्य आंकड़े और चुनावी गणित
पंजाब राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार चुनाव 8 नगर निगमों (Mohali, Bathinda, Abohar, Barnala, Kapurthala, Moga, Batala, Pathankot), 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के कुल 1,977 वार्डों के लिए बैलेट पेपर के जरिए 26 मई को कराए गए थे, जिसमें 63.94% मतदान दर्ज हुआ था।
कुल 1,977 वार्डों में से प्रमुख पार्टियों की अंतिम स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
| राजनीतिक दल | जीती गई सीटें (वार्ड) |
| आम आदमी पार्टी (AAP) | 954 |
| कांग्रेस (INC) | 390 |
| निर्दलीय (Independents) | 251 |
| शिरोमणि अकाली दल (SAD) | 191 |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 170 |
| बहुजन समाज पार्टी (BSP) | 07 |
नगर निगमों का हाल: कहाँ कौन जीता?
पंजाब के 8 प्रमुख नगर निगमों में से 5 पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार जीत दर्ज की है।
-
AAP का गढ़: पार्टी ने मोहाली, बठिंडा और बरनाला (जो भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल ढिल्लों का गृह क्षेत्र है) जैसे वीआईपी इलाकों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह क्षेत्र धुरी में भी ‘आप’ ने 21 में से 20 वार्ड जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया।
-
कांग्रेस का पलटवार: कपूरथला नगर निगम में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सत्ताधारी दल AAP को बड़ा झटका दिया है।
-
भाजपा की मौजूदगी: भाजपा ने अबोहर नगर निगम में अपनी जीत का परचम लहराया और पठानकोट में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
चुनाव की कुछ अनोखी और दिलचस्प कहानियां
इस चुनाव में कुछ ऐसे वाकये भी देखने को मिले जिन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा:
-
सिक्का उछालकर (Coin Toss) हुआ फैसला: पटियाला जिले के राजपुरा नगर परिषद के वार्ड नंबर 7 में भाजपा की नीलम मेहता और AAP उम्मीदवार दोनों को बराबर 953 वोट मिले। इसके बाद प्रशासन ने दोनों की सहमति से सिक्का उछाला (टॉस किया), जिसमें किस्मत ने भाजपा का साथ दिया और नीलम मेहता को विजेता घोषित किया गया।
-
सिर्फ 1 वोट से जीत: श्री मुक्तसर साहिब नगर परिषद के वार्ड नंबर 30 में शिरोमणि अकाली दल की वंदना शर्मा ने महज 1 वोट के अंतर से ऐतिहासिक और बेहद रोमांचक जीत दर्ज की।
-
किन्नर माही महंत की ऐतिहासिक जीत: समाज सेवा से राजनीति में आईं किन्नर माही महंत ने एकतरफा जीत हासिल की। उनकी जीत के बाद पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने खुद पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
पंजाब स्थानीय निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) की बंपर जीत के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। इस ऐतिहासिक जीत से गदगद AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।
अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए तंज कसा कि “इन चुनावों में ‘ED पार्टी’ का पूरी तरह सफाया हो गया है।”
केजरीवाल का बड़ा बयान: “काम की राजनीति की जीत:
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता का आभार जताते हुए कहा कि यह जीत मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और विकास कार्यों पर जनता की अटूट मुहर है।
भाजपा को घेरते हुए केजरीवाल ने कहा: “विपक्ष ने हमारे खिलाफ हर तरह की साजिश रची, केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाया, लेकिन पंजाब के जागरूक मतदाताओं ने नफरत और केंद्रीय एजेंसियों की राजनीति को नकार कर काम की राजनीति को चुना है। चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि पंजाब में अब ‘ED पार्टी’ (भाजपा) के लिए कोई जगह नहीं बची है।”
भगवंत मान बोले- “विपक्ष को मिला करारा जवाब”
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी अरविंद केजरीवाल के बयान का समर्थन करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार चुनाव टालने की कोशिश कर रहा था और मतपेटियों (Ballot Papers) को लेकर झूठा शोर मचा रहा था।
-
जनता का जवाब: मान ने कहा कि जनता ने मतपेटियों के जरिए विपक्ष के अहंकार को चकनाचूर कर दिया है।
-
2027 का रोडमैप: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि स्थानीय निकायों की यह जीत सिर्फ शुरुआत है और यह स्पष्ट संकेत है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में भी पंजाब की जनता AAP को ही चुनेगी।
भाजपा और विपक्ष का पलटवार
केजरीवाल के ‘ED पार्टी’ वाले तंज पर भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
-
भाजपा का तर्क: भाजपा नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी दल हमेशा सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके स्थानीय चुनाव जीतता है। अबोहर निगम और कई वार्डों में भाजपा की जीत यह दिखाती है कि शहरी मतदाता भाजपा के साथ हैं।
-
कांग्रेस और अकाली दल का आरोप: विपक्ष का आरोप है कि AAP सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का रोना रो रही है, जबकि जमीनी हकीकत में पंजाब की कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है।
विपक्ष के आरोप और मतपेटियों (Ballot Paper) पर विवाद
विपक्षी दलों कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विपक्ष का तर्क: कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और अकाली दल के नेताओं का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव हमेशा सत्ताधारी दल के पक्ष में ही जाते हैं। विपक्ष ने चुनाव में ईवीएम (EVM) के बजाय मतपेटियों (Ballot Papers) के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और इसे नतीजों को प्रभावित करने का जरिया बताया।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी ने इस जीत के साथ शहरी पंजाब में अपनी पकड़ को और मजबूत किया है। हालांकि, राजनीति के जानकार इतिहास का हवाला देते हुए एक चेतावनी भी दे रहे हैं। साल 2021 के निकाय चुनावों में तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने 1,500 से ज्यादा सीटें जीतकर एकतरफा सफाई की थी, लेकिन उसके ठीक कुछ महीनों बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने ऐतिहासिक 92 सीटें जीतकर कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
इसलिए, 2026 के ये नतीजे निश्चित रूप से AAP के लिए उत्साहजनक हैं, लेकिन फरवरी 2027 की असली सियासी जंग के लिए सभी पार्टियों को जमीनी स्तर पर नए समीकरण बनाने होंगे।
इस चुनावी जीत और केजरीवाल के आक्रामक रुख से साफ है कि आम आदमी पार्टी इस मोमेंटम को फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों तक बरकरार रखना चाहती है। दिल्ली और पंजाब में केंद्रीय एजेंसियों (ED/CBI) की कार्रवाई को झेल चुकी AAP अब बैकफुट के बजाय फ्रंटफुट पर आकर भाजपा को घेरने की रणनीति अपना रही है।
यह बंपर जीत निश्चित रूप से AAP कार्यकर्ताओं के लिए बूस्टर डोज साबित होगी, लेकिन विधानसभा चुनाव की राह इतनी आसान नहीं होगी, क्योंकि मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय और चौकोणीय होने की पूरी उम्मीद है।