Monsoon Trough: भारतीय मानसून का वो जादुई ‘वेदर रिमोट’ जो तय करता है कहां होगी बारिश और कहां पड़ेगा सूखा!

Monsoon Trough

भारत में जब काले-घने बादल छाते हैं और मूसलाधार बारिश होती है, तो हम अक्सर कहते हैं कि मानसून आ गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे के पीछे इस पूरी बारिश को कंट्रोल करने वाला एक ‘सुपर विलेन’ या ‘सुपर हीरो’ भी है? मौसम विज्ञान की भाषा में इसे मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) कहते हैं। यह कोई आम हवा का झोंका नहीं है, बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप के मौसम का असली ‘रिमोट कंट्रोल’ है। अगर यह ट्रफ थोड़ा सा भी ऊपर या नीचे खिसक जाए, तो देश के एक हिस्से में बाढ़ आ जाती है और दूसरे हिस्से में बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मच जाता है।

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य का कोई खतरा नहीं, बल्कि एक वर्तमान हकीकत बन चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा दैनिक वेदर ट्रैकर के अनुसार, देश इस समय एक बेहद अजीब और खतरनाक मौसमी असंतुलन से गुजर रहा है। एक तरफ जहां कुछ राज्यों में आसमान से इतनी बारिश हो रही है कि बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्य भीषण उमस और सूखी गर्मी से बेहाल हैं।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम में ‘रेड अलर्ट’ (Red Alert) – अत्यधिक भारी बारिश

मौसम विभाग ने उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल (Sub-Himalayan West Bengal) और सिक्किम के पहाड़ी इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि यहां जान-माल के नुकसान की आशंका है और तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाने की जरूरत है।

  • खतरे का कारण: बंगाल की खाड़ी से आ रही अत्यधिक नम हवाएं इन पहाड़ी क्षेत्रों से टकराकर थम गई हैं, जिससे बादलों का एक मजबूत सिस्टम बन गया है।

  • क्या होगा असर? इन इलाकों में 24 घंटे के भीतर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है। सिक्किम को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीषण भूस्खलन (Landslides) का खतरा है। इसके अलावा, तीस्ता जैसी पहाड़ी नदियों में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) निचले इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर सकती है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पहाड़ों की यात्रा न करने की सख्त सलाह दी है।

उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत में ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) – भारी से बहुत भारी बारिश

प्रकृति का दूसरा प्रहार देश के उत्तरी पहाड़ों और पूर्वी छोर पर हो रहा है, जहां उत्तराखंड और पूर्वोत्तर (Northeast) के राज्यों (जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश) के लिए ऑरेंज अलर्ट सक्रिय है। ऑरेंज अलर्ट का सीधा मतलब होता है कि स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है और लोगों को मौसम के प्रति ‘तैयार’ रहना चाहिए।

  • उत्तराखंड का हाल: चारधाम यात्रा मार्ग और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे पहाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। यहां बादल फटने (Cloudburst) जैसी चरम घटनाएं होने का रिस्क बढ़ गया है।

  • पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा: असम और मेघालय में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। ऑरेंज अलर्ट के चलते काजीरंगा नेशनल पार्क और आसपास के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुसने की आशंका तेज हो गई है।

कई राज्यों में ‘उमस भरी भीषण गर्मी’ (Humid Heat) का प्रकोप

इस वेदर ट्रैकर का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जहां देश का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब रहा है, वहीं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई मैदानी राज्य—जैसे दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान—असहनीय उमस वाली गर्मी (Humid Heat) की मार झेल रहे हैं।

  • क्या है ‘ह्यूमिड हीट’? इन राज्यों में तापमान तो 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, लेकिन हवा में नमी (Humidity) का स्तर 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

  • ‘रिएल फील’ का कहर: जब हवा में नमी ज्यादा होती है, तो शरीर का पसीना नहीं सूखता। इसके कारण इंसान को जो तापमान महसूस होता है (उसे ‘रिएल फील’ या हीट इंडेक्स कहते हैं), वह 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला जाता है। यह स्थिति सेहत के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

इस अजीबो-गरीब मौसम के पीछे ‘जलवायु परिवर्तन’ का हाथ

मौसम वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि मौसम का यह दोहरा रूप सीधे तौर पर ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन का नतीजा है:

  1. तापमान में बढ़ोतरी: जैसे-जैसे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, हवा की नमी सोखने की क्षमता भी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि जब बारिश होती है, तो वह सीधे ‘क्लाउडबर्स्ट’ या मूसलाधार रूप ले लेती है।

  2. मानसून का अनियमित पैटर्न: मानसून की अवधि अब स्थिर नहीं रही। बारिश के दिन (Rainy Days) कम हो रहे हैं, लेकिन जितने भी दिन बारिश होती है, वह बहुत कम समय में बहुत अधिक बरस जाती है। इसके कारण बाकी के दिन मैदानी इलाकों में केवल उमस और सूखी गर्मी ही बचती है।

आखिर क्या है यह मानसून ट्रफ? (The Low-Pressure Magnet)

वैज्ञानिक भाषा में मानसून ट्रफ कम हवा के दबाव (Low Pressure) का एक लंबा, फैला हुआ क्षेत्र (Elongated Zone) होता है। इसे आप हवा का एक विशाल ‘गड्ढा’ या ‘मैग्नेट’ समझ सकते हैं।

  • लोकेशन: यह ट्रफ आमतौर पर पाकिस्तान के मैदानी इलाकों (थार मरुस्थल) से शुरू होकर, उत्तर भारत के गंगा के मैदानों (पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार) से गुजरती हुई सीधे बंगाल की खाड़ी तक फैली होती है।

  • यह काम कैसे करती है? चूंकि इस पूरी बेल्ट में हवा का दबाव बहुत कम होता है, इसलिए आसपास के समुद्रों (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी) से आने वाली भारी, ठंडी और नमी से लदी मानसूनी हवाएं इस गड्ढे को भरने के लिए इसकी तरफ तेजी से दौड़ती हैं।

  • बादलों का बनना: जब ये नम हवाएं इस गर्म क्षेत्र में आकर आपस में टकराती हैं, तो वे तेजी से ऊपर की ओर उठती हैं। ऊपर जाकर ये हवाएं ठंडी होती हैं, जिससे विशालकाय मानसूनी बादलों (Cumulonimbus Clouds) का निर्माण होता है और झमाझम बारिश शुरू हो जाती है।

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